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अमेरिका-इज़राइल पर आरोप, प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग! ईरान में ‘पूर्ण नियंत्रण’ के दावे की क्या है पूरी कहानी ?

news desk
Last updated: January 12, 2026 7:23 pm
news desk
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ईरान विरोध प्रदर्शन, पूर्ण नियंत्रण का दावा
ईरान विरोध प्रदर्शन, पूर्ण नियंत्रण का दावा
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तेहरान/नई दिल्ली: ईरान में बीते दो हफ्तों से हालात लगातार बिगड़े हुए हैं। देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बीच सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण का दावा किया है, लेकिन ज़मीनी हालात इस दावे से अलग नजर आ रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि सुरक्षा बलों ने देश पर “पूर्ण नियंत्रण” हासिल कर लिया है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब इंटरनेट ब्लैकआउट, सड़कों पर फौज और बढ़ती मौतों ने आम लोगों की चिंता और गुस्से को और बढ़ा दिया है।

सरकार का दावा बनाम सड़कों की हकीकत

अराघची ने अमेरिका और इज़राइल पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन देशों ने ईरान के अंदर हालात बिगाड़ने की कोशिश की है। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण विरोध को जानबूझकर हिंसक बनाया गया ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हस्तक्षेप का मौका मिल सके। विदेश मंत्री ने प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी गतिविधियों” से जोड़ते हुए दावा किया कि पुलिस और नागरिकों की हत्या की गई और सार्वजनिक संपत्ति को दाएश-शैली की हिंसा में नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 8 जनवरी से बंद इंटरनेट सेवाएं जल्द बहाल कर दी जाएंगी।

हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विरोध अब भी जारी हैं। HRANA और एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, दो हफ्तों में 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 2,000 तक बताई जा रही है। ईरान के सभी 31 प्रांतों के 190 से ज्यादा शहर इस आंदोलन की चपेट में हैं। तेहरान, मशहद, शिराज और इस्फहान जैसे बड़े शहरों में “खामेनेई मौत” और “रेज़ा पहलवी वापस आओ” जैसे नारे गूंज रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ता तनाव
सुरक्षा बलों की सख्ती भी लगातार चर्चा में है। लाइव फायरिंग, आंसू गैस और मेटल पेलेट्स के इस्तेमाल के आरोप लग रहे हैं, जबकि IRGC की भारी तैनाती से हालात और सख्त हो गए हैं। इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने से देश के अंदर की जानकारी बाहर आना मुश्किल बना हुआ है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” बता चुके हैं, वहीं राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने आर्थिक सुधारों का वादा करते हुए साफ किया है कि सरकार अस्थिरता बर्दाश्त नहीं करेगी।

दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी तेज हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “बड़ी मुसीबत” में बताया और सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दी है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रदर्शनकारियों के संघर्ष से सहानुभूति जताई है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा की निंदा करते हुए इंटरनेट बहाल करने की मांग की है। वहीं, निर्वासित क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से हड़ताल और शहरों पर कब्जे की अपील की है।

महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन, अब सिस्टम पर सवाल

दरअसल, इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब रियाल की गिरती कीमत, 40–50 प्रतिशत महंगाई और बिजली-गैस की कमी ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया। समय के साथ यह आंदोलन सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा और अब सीधे शासन परिवर्तन की मांग में बदलता नजर आ रहा है। 2025 में इज़राइल के साथ हुए संघर्ष के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का “पूर्ण नियंत्रण” का दावा हालात को काबू में दिखाने की कोशिश हो सकती है, लेकिन सड़कों पर जारी विरोध यह साफ कर रहे हैं कि ईरान का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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TAGGED: Abbas Araghchi, Amnesty International, Donald Trump Iran, global reaction, HRANA, Human rights Iran, Internet blackout Iran, Iran Protests, Iran unrest, IRGC, Israel Iran tension, Middle East Crisis, Regime change Iran, Reza Pahlavi, Tehran Protests
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