नई दिल्ली: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सावन में प्राकृतिक रूप से पांच पत्तियों वाला पंचमुखी बेलपत्र मिल जाए और उसे विधि-विधान से शिवलिंग पर अर्पित किया जाए, तो भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आमतौर पर पूजा में तीन पत्तियों वाला बेलपत्र उपयोग किया जाता है, लेकिन पंचमुखी बेलपत्र अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। इसमें एक ही डंठल पर प्राकृतिक रूप से पांच पत्तियां जुड़ी होती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसका मिलना बेहद शुभ संकेत माना जाता है। शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी पंचमुखी बेलपत्र के महत्व का उल्लेख मिलता है।
जैसे तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है, उसी तरह पंचमुखी बेलपत्र भगवान शिव के पांच स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी पांचों पत्तियां सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईशान स्वरूप का प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करता है, उस पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसकी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
पंचमुखी बेलपत्र अर्पित करने से पहले उसे स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धो लें। यह भी सुनिश्चित करें कि बेलपत्र कहीं से खंडित या टूटा हुआ न हो। इसके बाद अनामिका उंगली की सहायता से पंचमुखी बेलपत्र की पांचों पत्तियों पर श्रद्धापूर्वक ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखें।
अब दोनों हाथों से बेलपत्र को सम्मानपूर्वक पकड़कर पूरे श्रद्धाभाव के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय मन ही मन “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्” या पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना शुभ माना जाता है।
मान्यताओं के अनुसार, सावन में पंचमुखी बेलपत्र से भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और विधि-विधान से अर्पित किया गया यह बेलपत्र भगवान शिव की कृपा का माध्यम माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्त की मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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