अयोध्या के श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितता का यह हाई-प्रोफाइल मामला अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ गया है. नियमित ऑडिट के दौरान सामने आई वित्तीय गड़बड़ियों से शुरू हुआ यह विवाद अब एसआईटी (SIT) जांच, ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफों तक पहुंच चुका है.
इसी बीच, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का 7 जुलाई को वायरल हुआ एक हस्ताक्षरित पत्र सामने आया है, जिसने इस पूरे कुप्रबंधन के पीछे छिपे कई बड़े राज उजागर कर दिए हैं। चंपत राय ने सीधे तौर पर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कार्यप्रणाली को इस महाविवाद के कटघरे में खड़ा कर दिया है।
चंपत राय द्वारा एसआईटी को लिखे गए इस वायरल पत्र से साफ होता है कि इस पूरी गड़बड़ी की पटकथा महाकुंभ के दौरान लिखी गई थी।
चंपत राय ने अपने पत्र में केवल अनिल मिश्रा को ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) की कार्यप्रणाली को भी आड़े हाथों लिया है।
पूर्व महासचिव चंपत राय ने एसआईटी से इस मामले में बैंक के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि फरवरी में जो समझौता ज्ञापन (MoU) साइन हुआ, उसने कैश काउंटिंग की पूरी सुरक्षा प्रणाली में खामियां पैदा कर दीं। यह समझौता वित्तीय सुरक्षा के सामान्य नियमों और संहिता के बिल्कुल अनुरूप नहीं लगता, इसलिए इसकी गहन जांच के लिए बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन को भी इस जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए।
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