संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) की शुरुआत से ठीक पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में रविवार को उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को न्योता दिए जाने पर समूचा विपक्ष भड़क गया। कांग्रेस, सपा, टीएमसी और शिवसेना (UBT) समेत तमाम विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को पूरी तरह ‘अलोकतांत्रिक’ बताते हुए बैठक से प्रतीकात्मक वॉकआउट (Symbolic Walkout) कर दिया। हालांकि, बाहर आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद सभी विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
सर्वदलीय बैठक से बाहर आकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सपा, डीएमके, आप, जेएमएम और वाम दलों सहित पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर इस गलत परंपरा का विरोध किया है।
महुआ मोइत्रा का आरोप: “आधिकारिक टीएमसी सांसदों की जगह पहले बागी सांसदों की लिस्ट दिखाई गई। जिस गुट के 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं दी है और जिनकी सदस्यता रद्द करने की याचिकाएं पेंडिंग हैं, उन्हें संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर देश की सबसे बड़ी बैठक का निमंत्रण दे दिया?”
बैठक के दौरान जेएमएम की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने महिलाओं को आरक्षण देने के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन (Delimitation) से जोड़कर पेचीदा बना दिया है। माझी ने चेतावनी दी कि अगर पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, तो झारखंड जैसे राज्यों में आदिवासियों (ST) का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिसे उनकी पार्टी कतई स्वीकार नहीं करेगी।
विपक्ष के इस कड़े तेवर और वॉकआउट के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि सोमवार से शुरू हो रहा मानसून सत्र बेहद महत्वपूर्ण है। रिजिजू ने कहा, “सरकार हर नियम और कायदे के तहत विपक्ष की बात सुनने को तैयार है। हम उम्मीद करते हैं कि विपक्ष भी सदन में सरकार की बात सुनेगा, क्योंकि संसद सुचारु रूप से चलने पर ही जनता का फायदा होगा।”
आगे क्या होगा? सत्र शुरू होने से ठीक पहले हुए इस जबर्दस्त ड्रामे ने यह साफ कर दिया है कि 20 जुलाई से शुरू हो रहा संसद का मानसून सत्र बेहद हंगामेदार रहने वाला है। विपक्ष ने बागी सांसदों के मुद्दे, टैक्स रिफॉर्म्स और परिसीमन को लेकर सरकार के खिलाफ अपनी रणनीति के आक्रामक संकेत दे दिए हैं।
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