नई दिल्ली: बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों के दावों पर नई रिसर्च ने सवाल खड़े कर दिए हैं। अध्ययन में दावा किया गया है कि Instagram, Snapchat और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कई सुरक्षा फीचर्स या तो प्रभावी ढंग से काम नहीं करते या फिर उन्हें आसानी से दरकिनार किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन कमियों की वजह से नाबालिग उपयोगकर्ताओं की ऑनलाइन सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
रिसर्च में क्या सामने आया
रिपोर्ट के मुताबिक, New York University और Northeastern University के शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध टीनएजर्स से जुड़े सुरक्षा फीचर्स का परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि कई फीचर्स कंपनियों के दावों के अनुरूप काम नहीं कर रहे थे। कुछ सुरक्षा उपायों को कुछ ही सेकंड में बायपास किया जा सकता था, जबकि कुछ फीचर्स केवल दावों तक सीमित दिखाई दिए।
Snapchat में यूजरनेम के जरिए पहुंच संभव
रिसर्च के दौरान Snapchat के उस दावे की भी जांच की गई, जिसमें कहा गया था कि टीनएजर्स केवल उन्हीं लोगों को दिखाई देंगे जो उनके साझा मित्र हों। हालांकि, अध्ययन में पाया गया कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी किशोर का यूजरनेम हो तो वह आसानी से उसका अकाउंट खोज सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि प्लेटफॉर्म ऐसे वयस्क प्रोफाइल भी सुझाव के तौर पर दिखा रहा था जिनका किशोर उपयोगकर्ताओं से कोई संबंध नहीं था।
Instagram के सुझावों पर भी सवाल
Meta ने टीन अकाउंट्स लॉन्च करते समय कहा था कि किशोरों के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहेंगे और अनचाहे संपर्क सीमित होंगे। लेकिन रिसर्च के दौरान बनाए गए एक नए टीन अकाउंट में “Suggested for You” सेक्शन में बड़ी संख्या में ऐसे वयस्क पुरुषों की प्रोफाइल दिखाई गईं, जिन्हें वह उपयोगकर्ता जानता तक नहीं था। इससे सुझाव प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
YouTube की स्क्रीन टाइम लिमिट पर भी उठे सवाल
रिसर्च में YouTube के स्क्रीन टाइम फीचर की भी जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 60 मिनट की निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद प्लेटफॉर्म स्वयं “Ignore limit for today” और “Change limit” जैसे विकल्प दिखा रहा था। हालांकि, YouTube का कहना है कि यदि अभिभावक Family Link के माध्यम से स्क्रीन टाइम तय करते हैं तो बच्चे उसमें बदलाव नहीं कर सकते।
सुरक्षा फीचर्स तक पहुंच आसान नहीं
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कई सुरक्षा फीचर्स इतने जटिल मेनू में मौजूद हैं कि सामान्य अभिभावकों के लिए उन्हें ढूंढना आसान नहीं है। कुछ फीचर्स डिफॉल्ट रूप से सक्रिय भी नहीं थे, जिससे उनका उपयोग और सीमित हो जाता है।
Meta ने अपने दावों का किया बचाव
Meta ने कहा कि टीन अकाउंट्स लागू होने के बाद किशोर उपयोगकर्ताओं में संवेदनशील सामग्री देखने की संख्या घटी है। कंपनी के अनुसार, रात के समय Instagram के उपयोग में कमी आई है और अनचाहे संपर्कों में भी पहले की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों ने सुधार की जरूरत बताई
Meta की पूर्व मनोवैज्ञानिक Anneke Buffone का कहना है कि कई सुरक्षा फीचर्स अधूरे हैं या इतने जटिल हैं कि उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। उनके अनुसार, बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन टूल्स को अधिक प्रभावी और सख्त बनाने की आवश्यकता है।
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