रियाद/दुबई। इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाकर किए गए एक संदिग्ध हूती ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
हालांकि, सऊदी रक्षा प्रणाली ने समय रहते इस हमले को नाकाम कर दिया, लेकिन इस घटना ने यमन के हूती विद्रोहियों और ईरान समर्थित लड़ाकों से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रॉयटर्स और क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हो रहे हमलों के कारण सऊदी अरब के पास मिसाइल रक्षा प्रणाली (Air Defense Interceptors) का स्टॉक बेहद कम हो गया है।
हथियारों की कमी से जूझ रहे सऊदी अरब ने अपनी सीमाओं, तेल प्रतिष्ठानों और पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए अब चार प्रमुख देशों-फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से तत्काल सैन्य सहायता और हवाई सुरक्षा सहयोग की गुहार लगाई है।
क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब इस वक्त बहुस्तरीय सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। देश को न केवल अपने रणनीतिक सैन्य अड्डों और सरकारी इमारतों की रक्षा करनी है, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को संभालने वाले अपने विशाल तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है।
सहयोगी देशों ने फिलहाल सऊदी अरब को कूटनीतिक और राजनयिक समर्थन दिया है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कितनी जल्दी सैन्य मदद पहुंचती है, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
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