नई दिल्ली: भारतीय रसोई में करी पत्ते का इस्तेमाल आमतौर पर दाल, पोहा और दक्षिण भारतीय व्यंजनों में तड़का लगाने के लिए किया जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद खाने को अलग पहचान देते हैं। हालांकि, आयुर्वेद और पोषण से जुड़े विशेषज्ञ करी पत्ते को सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाली चीज नहीं मानते। इसमें कई पोषक तत्व और पौधों के यौगिक पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। आमतौर पर लोग खाना खाते समय करी पत्ते को अलग निकालकर फेंक देते हैं, जबकि इसे भोजन का हिस्सा बनाकर खाया जा सकता है।
भारतीय योग गुरु, लेखिका, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक, करी पत्ता, जिसे मीठा नीम भी कहा जाता है, में ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो पाचन को दुरुस्त रखने और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, विटामिन सी, विटामिन ए के पूर्वरूप, फोलेट, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम के साथ कुछ मात्रा में विटामिन बी समूह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पौधों के यौगिक भी मौजूद होते हैं।
करी पत्ते को डाइट में शामिल करने से कई तरह के पोषक तत्व मिल सकते हैं। इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, विटामिन सी, विटामिन ए के पूर्वरूप यानी कैरोटेनॉयड्स, फोलेट, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम मौजूद होते हैं। इसके अलावा इसमें कुछ मात्रा में विटामिन बी समूह के पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पौधों के यौगिक भी पाए जाते हैं।
करी पत्ते में फाइबर और कुछ पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं, जिनके ब्लड शुगर पर संभावित प्रभावों को लेकर अध्ययन किए गए हैं। फाइबर भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के पाचन और ग्लूकोज के अवशोषण की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकता है। डायबिटीज के मरीज अपने भोजन में 8-10 करी पत्ते शामिल कर सकते हैं।
करी पत्ते का इस्तेमाल बालों और सिर की त्वचा की देखभाल के लिए पारंपरिक घरेलू नुस्खों में किया जाता रहा है। इसमें मौजूद पौधों के यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट बालों और त्वचा की देखभाल में भूमिका निभा सकते हैं। करी पत्ते को नारियल तेल के साथ पकाकर तैयार किए गए तेल को बालों में लगाने की परंपरा भी है। हालांकि, बाल झड़ने, डैंड्रफ या समय से पहले बाल सफेद होने जैसी समस्याओं को रोकने में करी पत्ते के तेल के चिकित्सीय प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
करी पत्ते में फाइबर और कई तरह के पौधों के यौगिक मौजूद होते हैं, जिसके चलते इसे वजन नियंत्रित करने वाली डाइट का हिस्सा बनाया जाता है। वजन कम करने के लिए केवल करी पत्ते पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और कुल कैलोरी सेवन पर ध्यान देना जरूरी है। इन चीजों के साथ डाइट में करी पत्ता शामिल करने से वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
करी पत्ते का इस्तेमाल पारंपरिक तौर पर मतली और पाचन से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होने वाली मॉर्निंग सिकनेस में भी करी पत्ते के सेवन को असरदार माना जाता है।
करी पत्ते में मौजूद फाइबर सामान्य पाचन और आंतों की सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है। इसे भोजन में शामिल करने से रोजाना के आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। करी पत्ते को माउथ फ्रेशनर की तरह या सौंफ के साथ खाने की परंपरा भी है। लगातार कब्ज, दस्त, पेट दर्द या भूख न लगने जैसी समस्या रहने पर रोज करी पत्ता खाने की सलाह दी जाती है।
करी पत्ते को किसी अलग औषधि की तरह लेने के बजाय रोज के भोजन में शामिल किया जा सकता है। इसे पोहा, उपमा, दाल, सब्जी, चटनी, सांभर और पुलाव में डाला जा सकता है। करी पत्ते को सुखाकर उसका पाउडर भी तैयार किया जा सकता है। इस तरह इसे केवल तड़के तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग व्यंजनों का हिस्सा बनाया जा सकता है।
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