सीरिया के इतिहास में मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को एक बड़ा और ऐतिहासिक न्याय प्रणाली फैसला सामने आया है। दमिश्क की एक क्रिमिनल कोर्ट ने देश के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद (Bashar al-Assad) और उनके छोटे भाई माहेर अल-असद (Maher al-Assad) को उनकी गैर-मौजूदगी (In Absentia) में फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों को 14 साल लंबे सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान नरसंहार,
यातना, बच्चों की हत्या और मानवता के खिलाफ अपराध (Crimes Against Humanity) का दोषी ठहराया है।
इस ऐतिहासिक फैसले में असद के चचेरे भाई और सीरियाई सेना के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल अतीफ नजीब (Atef Najib) को भी अदालत में सशरीर मौजूदगी के दौरान मौत की सजा सुनाई गई।
दमिश्क कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। बशर अल-असद के चचेरे भाई और दारा प्रांत में पॉलिटिकल सिक्योरिटी ब्रांच के पूर्व चीफ अतीफ नजीब को पीले कैदी के लिबास में लोहे के पिंजरे के अंदर लाया गया।
अतीफ नजीब वही सैन्य अधिकारी हैं, जिन्हें 2011 में दारा शहर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे स्कूली बच्चों और आम नागरिकों पर गोलियां चलाने और अमानवीय यातनाएं देने का आदेश जारी करने का मुख्य आरोपी माना जाता है। नजीब को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था और वह असद शासन का पहला इतना बड़ा अधिकारी है जिसे अदालत में सजा सुनाई गई है।
सीरियाई गृहयुद्ध की शुरुआत मार्च 2011 में दारा (Deraa) शहर से हुई थी।
दिसंबर 2024 में विद्रोही गुटों (HTS के नेतृत्व में) ने एक बड़ा सैन्य अभियान चलाकर महज कुछ दिनों में राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया था।
सत्ता हाथ से फिसलते ही बशर अल-असद अपने परिवार और भाई माहेर के साथ रातों-रात विशेष विमान से रूस भाग गए, जहाँ राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें राजनीतिक शरण दी। इसके साथ ही 1971 से चला आ रहा असद परिवार का 53 साल पुराना तानाशाही शासन खत्म हो गया था।
सीरिया में बनी नई अंतरिम सरकार (Transitional Authority) के प्रमुख अहमद अल-शरा (Ahmed al-Sharaa) ने असद शासन के दौरान हुए नरसंहार और वॉर क्राइम्स की जांच के लिए अदालतों का गठन किया था, जिसके तहत यह पहला बड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है।
अदालत का यह फैसला मुख्य रूप से सांकेतिक और नैतिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि बशर अल-असद और माहेर अल-असद वर्तमान में रूस में सुरक्षित हैं। अंतर्राष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक रूस असद का प्रत्यर्पण (Extradition) नहीं करता या रूस में सत्ता परिवर्तन नहीं होता, तब तक असद को फांसी के फंदे तक पहुंचाना सीरियाई प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा।
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