समिक भट्टाचार्य ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की बात कही, पवन खेड़ा बोले- ‘पद्म भूषण छोटी चीज, प्रधानमंत्री ही बना दीजिए’
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर चल रही सियासी बहस के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार की तारीफ करते हुए उन्हें कम से कम पद्म भूषण दिए जाने की बात कही। इसके जवाब में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि पद्म भूषण तो बहुत छोटी चीज है, उन्हें प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए।
समिक भट्टाचार्य ने शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के पानीहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि CEC को कम से कम पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए।
भट्टाचार्य ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान लंबे समय बाद लोगों को बिना डर के मतदान करने का मौका मिला और चुनाव के दौरान हत्या की कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने इसका श्रेय ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज को दिया।
बीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची की समीक्षा के दौरान चुनाव आयोग ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के नाम हटाने की दिशा में काम किया। यह उनके द्वारा किया गया राजनीतिक दावा है, जिसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं पेश किया जा सकता।
समिक भट्टाचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि पद्म भूषण तो बहुत छोटी चीज है, उन्हें प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए। उनका बयान ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
CEC को लेकर यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय हो रही है जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट ने चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, चुनावी डेटा के प्रबंधन और आयोग के डिजिटल सिस्टम जैसे मुद्दों से था।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को लेकर अपनी जानकारी और सहमति के बिना कार्रवाई किए जाने पर भी आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में उन्होंने चुनावी रोल के डिजिटल डेटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए।
इस विवाद में Form 6 भी अहम मुद्दा बन गया है। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में ऑनलाइन Form 6 में SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया। इसमें आवेदक से पूछा गया कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था या नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह हिस्सा अनिवार्य के तौर पर चिह्नित नहीं था, लेकिन इसका जवाब दिए बिना ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा था। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी होगा। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई।
SIR के तहत मतदाता सूची की समीक्षा और नामों के सत्यापन को लेकर बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि आयोग ने मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रक्रिया किए जाने की बात कही है।
ऐसे में एक तरफ बीजेपी नेता CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दल SIR और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में समिक भट्टाचार्य और पवन खेड़ा के बीच बयानबाजी ने विवाद को एक नया राजनीतिक एंगल दे दिया है।
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