मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषियों ने मृत्युदंड के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मेरठ की अदालत से फांसी की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने संयुक्त अपील दाखिल कर फैसले को रद्द करने की मांग की है। अपील में 30 सितंबर को सुनाए गए दोषसिद्धि के आदेश और 14 अक्टूबर को दिए गए मृत्युदंड के फैसले को चुनौती दी गई है। दोनों दोषियों ने आरोपों से बरी किए जाने की गुहार भी लगाई है। मामले में अगले सप्ताह हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई होने की संभावना है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग
मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा 14 अक्टूबर को सुनाई गई फांसी की सजा को चुनौती देते हुए दोनों दोषियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है। अपील में 30 सितंबर को सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले और 14 अक्टूबर के मृत्युदंड के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है।
दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट से संबंधित कानूनी धाराओं के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी करने की गुहार लगाई है। यह अपील उनके वकीलों के माध्यम से दाखिल की गई है। अब हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान दोषियों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला, निधि त्रिवेदी, रवितेंद्र प्रताप सिंह चन्देल और संदीप कुमार दुबे रखेंगे।
क्या था सनसनीखेज ‘नीले ड्रम‘ का पूरा मामला?
मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में सामने आए सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम का इस्तेमाल किया गया था। शव को ड्रम में रखकर उसमें सीमेंट और कंक्रीट भरकर बंद कर दिया गया था। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मेरठ कोर्ट में मामले का सेशन ट्रायल चला और अदालत ने इसे विरल से विरलतम मामला माना।
30 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी ठहराया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई गई। अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। इसके अलावा सबूत छिपाने से संबंधित धारा के तहत भी सजा सुनाई गई। अब दोनों दोषियों ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।