Trending News

क्या वाकई ‘सुपर अल नीनो’ ने रोक दिया है भारत का मानसून? जानिए उत्तर भारत में सूखे का असली सच!

जून का महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन उत्तर और मध्य भारत के एक बहुत बड़े हिस्से में आसमान से आग बरस रही है। देश के किसान खेतों में आई गहरी दरारों को देखकर टेंशन में हैं, तो वहीं आम जनता भीषण उमस और रिकॉर्डतोड़ गर्मी से पूरी तरह बेहाल है। आज हर जुबान पर बस एक ही सुलगता हुआ सवाल है कि केरल और पूर्वोत्तर भारत में धमाकेदार एंट्री करने के बाद आखिर मानसून कहां ‘लापता’ हो गया और क्यों अचानक इसकी रफ्तार पर ब्रेक लग गया, IMD द्वारा जारी की गई ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरें और डेटा बेहद चौंकाने वाले हैं। इन विजुअल्स से साफ है कि मानसून के इस तरह अचानक रूठने के पीछे कोई लोकल वेदर चेंज नहीं है, ये सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं है, बल्कि प्रशांत महासागर में फटा एक ग्लोबल ‘क्लाइमेट बम’ है, जिसने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के वेदर सिस्टम को हिलाकर रख दिया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग “IMD” के ताज़ा साइंटिफिक एनालिसिस के मुताबिक, जून के शुरुआती हफ्तों में मानसून के थमने के पीछे दो सबसे बड़े फैक्टर्स काम कर रहे हैं। इसमें पहला और सबसे मुख्य कारण है ‘सोमाली जेट’ का अचानक सुस्त पड़ जाना। सोमाली जेट दरअसल अफ्रीका के पूर्वी तट से उठने वाली वह बेहद पावरफुल समुद्री हवा है, जो अरब सागर के ऊपर से गुजरते हुए भारी मात्रा में मॉइश्चर “नमी” खींचती है और उसे भारत की मुख्य भूमि तक डिलीवर करती है। वेदर साइंटिस्ट्स इसे भारतीय मानसून की मेन ‘कन्वेयर बेल्ट’ भी कहते हैं। इस साल जून की शुरुआत में यह बेल्ट काफी कमजोर पड़ गई, जिसके कारण देश के अंदरूनी और उत्तरी इलाकों तक पर्याप्त नमी वाले बादल पहुंच ही नहीं पाए।

इसके साथ ही, मानसून का रास्ता रोकने में दूसरा बड़ा विलेन ‘सूखी हवाओं का दखल’  रहा है। जून के शुरुआती पखवाड़े में पश्चिमी और मध्य भारत के एटमॉस्फेयर में लगातार सूखी और गर्म हवाओं का फ्लो बना रहा। इन ड्राई विंड्स ने अरब सागर से आने वाली बची-कुची नमी को भी पूरी तरह सोख लिया। नतीजा यह हुआ कि आसमान में घने बादल बनने और उनके बरसने की नेचुरल प्रोसेस पूरी तरह से ठप हो गई, जिससे उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश का वेटिंग पीरियड लंबा होता चला गया।

इस लोकल सुस्ती के बीच, अमेरिकी मौसम एजेंसी और यूरोपीय संघ की ‘कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस’ ने ग्लोबल लेवल पर एक बेहद अलार्मिंग और डराने वाला अलर्ट जारी किया है। क्लाइमेट साइंटिस्ट्स का कहना है की प्रशांत महासागर का टेम्परेचर इस समय इंसानी इतिहास में सबसे तेजी से बढ़ रहा है, जिसने ग्लोबल वेदर सिस्टम में एक ‘सुपर अल नीनो’ को ट्रिगर कर दिया है। यह कोई नॉर्मल अल नीनो नहीं है, बल्कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण अब तक का सबसे विनाशकारी रूप ले चुका है। कंप्यूटर मॉडल्स के अनुसार, इस ‘महा-अल नीनो’ का असली और सबसे खतरनाक इम्पैक्ट सितंबर 2026 से दिखाई देना शुरू होगा, जो दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच अपने पीक पर पहुंचेगा। वैज्ञानिकों को डर है कि इसके असर से भारत सहित पूरे एशियाई क्षेत्र में भीषण सूखा, अभूतपूर्व वॉटर क्राइसिस और जानलेवा हीटवेव के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं।

जून महीने के जो आंकड़े अब तक सामने आए हैं, वे देश के एग्री-सेक्टर के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। आधी जून बीतने के बाद भी पूरे देश में एवरेज रूप से सामान्य से लगभग 41% कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे खराब हालात मध्य भारत में हैं, जहां बारिश में 67% की रिकॉर्ड कमी देखी गई है, जबकि नॉर्थ-ईस्ट में भी यह आंकड़ा 42% कम है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और तमिलनाडु समेत देश के करीब 12 बड़े राज्य इस समय सूखे जैसे गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे खरीफ की मुख्य फसलों, विशेषकर धान, दालें और तिलहन की बुआई का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मानसून ने अगले कुछ दिनों में देशव्यापी रफ्तार नहीं पकड़ी, तो इसका सीधा और तीखा वार आम आदमी की जेब और देश की इकोनॉमी पर पड़ेगा। फसलों की बुआई प्रभावित होने से आने वाले समय में अनाज, दालों और हरी सब्जियों की शॉर्टेज बढ़ सकती है, जिससे फूड इन्फ्लेशन का एक नया चक्रव्यूह खड़ा हो जाएगा। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से रूरल इकोनॉमी को तो भारी चपत लगेगी ही, साथ ही महंगाई को कंट्रोल करने के चक्कर में रिजर्व बैंक RBI के लिए भी इंटरेस्ट रेट्स को मैनेज करना और ग्रोथ रेट को बनाए रखना बेहद पेचीदा हो जाएगा।

ताज़ा फोरकास्ट मॉडल्स के संकेत बताते हैं कि 20 जून के बाद से सोमाली जेट हवाएं समुद्र में एक बार फिर मजबूत होना शुरू हो गई हैं। पश्चिमी तट पर सूखी हवाओं का असर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है और अरब सागर से मॉइश्चर का फ्लो भारतीय मुख्य भूमि की तरफ लौट रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि जून के आखिरी हफ्ते में मानसून दोबारा अपनी पूरी पावर से जागेगा और दिल्ली, यूपी, पंजाब, हरियाणा समेत उत्तर-पश्चिमी भारत की तरफ तेजी से आगे बढ़ेगा।

news desk

Recent Posts

US-Iran Peace Talks: लेक लूसर्न समिट में ऐतिहासिक ‘ब्रेकथ्रू’; तेल निर्यात से हटी पाबंदी, शांति बहाली के लिए बनीं 4 पावरफुल कमेटियां!

बड़ी कूटनीतिक जीत: कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच 14-पॉइंट…

35 minutes ago

Samsung की बादशाहत हुई खत्म! AI के तूफान में उड़ा नंबर-1 का ताज, SK Hynix बनी साउथ कोरिया की नई किंग

ग्लोबल टेक वर्ल्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस “AI” के बूम ने साउथ कोरिया के कॉर्पोरेट इतिहास…

42 minutes ago

‘यूज़लेस फैलो, चुप बैठो!’: कर्नाटक में CM डीके शिवकुमार के समर्थकों पर भड़के मल्लिकार्जुन खरगे, लाइव मंच से दी बड़ी चेतावनी

खरगे का हाई-वोल्टेज गुस्सा: नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण में नारेबाजी पर…

48 minutes ago

पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई पर उनके गांव में जानलेवा हमला! हालत गंभीर, पटना AIIMS किए गए रेफर

बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी के परिवार से एक बेहद हैरान करने वाली खबर आ रही…

3 hours ago

NEET Re-Exam 2026: लखीसराय में ‘ऑपरेशन मुन्नाभाई’ से हड़कंप; 3 परीक्षा केंद्रों से 9 सॉल्वर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा!

बड़ी कार्रवाई: नीट (UG) री-एग्जाम के दौरान लखीसराय पुलिस और प्रशासन का संयुक्त एक्शन। 3…

5 hours ago

ईरान की ‘खोर्रमशहर’ मिसाइल से कांपा इजरायल: तेहरान ने दी ट्रंप को चेतावनी, नेतन्याहू बोले- ‘जब तक मैं PM हूं, परमाणु…’

महा-हमला: ईरान ने अपनी सबसे घातक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल 'खोर्रमशहर' से इजरायल को…

5 hours ago