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गॉसिप से शुरू हुआ ‘डिजिटल फ्रॉड’: वॉट्सऐप के जरिए रातों-रात लखपति बने बेरोजगार, चंदौली पुलिस ने किया भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से अपराध की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। यहाँ वॉट्सऐप पर होने वाली साधारण ‘गॉसिप’ और चैटिंग ने कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर दिया। कल तक जो लोग जेब से खाली और बेरोजगार थे, वे अचानक लग्जरी गाड़ियों और महंगे स्मार्टफोन्स में घूमने लगे। लेकिन इनका ये ‘शॉर्टकट’ उन्हें सीधे जेल की सलाखों के पीछे ले गया।

कैसे शुरू हुआ करोड़ों का खेल?
पुलिस जांच में सामने आया कि इस गैंग के मेम्बर वॉट्सऐप ग्रुप्स और सोशल मीडिया के जरिए एक्टिव रहते थे। शुरुआती गॉसिप के बाद, ये लोगों को ‘टास्क बेस्ड जॉब’ और ‘इन्वेस्टमेंट’ के नाम पर झांसा देते थे। गिरोह का जाल इतना गहरा था कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों से हाथ मिला रखा था।

पुलिस की छापेमारी में मिला कुबेर का खजाना
चंदौली पुलिस ने जब एक सीक्रेट इनपुट के आधार पर रेड की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। छापेमारी में जो बरामदगी हुई, उसने इस पूरे डिजिटल स्कैम की पोल खोलकर रख दी। पुलिस के हाथ कुछ ऐसा लगा जिसकी उन्हें उम्मीद तक नहीं थी:

आरोपियों के बैंक स्टेटमेंट खंगालने पर पुलिस के होश उड़ गए; पिछले कुछ ही दिनों में खातों में करोड़ों का ट्रांजैक्शन हुआ था। ताज्जुब की बात ये थी कि बिना किसी लीगल इनकम सोर्स के ये लोग बेहद लग्जरी लाइफस्टाइल मेंटेन कर रहे थे। मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी सिम कार्ड, हाई-एंड स्मार्टफोन्स और कई लेटेस्ट लैपटॉप्स ज़ब्त किए हैं।

जाने कैसे फंसाते थे ये जाल में
इस रैकेट के काम करने का तरीका काफी प्रोफेशनल है:
ठगी के ब्लैक मनी को सफेद करने के लिए ये सिंडिकेट मासूम लोगों के बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट्स'(किराए के बैंक खाते) की तरह इस्तेमाल करता था। ये कभी पुलिस तो कभी सरकारी अफसर बनकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते और फिर केस रफा-दफा करने के लिए सेटलमेंट’ के नाम पर लाखों रुपए ऐंठ लेते| इस रैकेट के प्राइम टारगेट पर अक्सर बुजुर्ग और मिडिल क्लास लोग होते थे, जो टेक्नोलॉजी की दुनिया से कम वाकिफ हैं|

पुलिस प्रशासन की अपील
एसपी चंदौली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जनता से अपील की है कि वो किसी भी अनजान वॉट्सऐप ग्रुप का हिस्सा न बनें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी बैंक या सरकारी संस्था फोन पर पैसे की मांग नहीं करती। और आगे ये भी बताया साइबर अपराधी अब छोटे शहरों को अपना ठिकाना बना रहे हैं। हमारी टीम तकनीकी सर्विलांस के जरिए इन पर नजर रख रही है। किसी भी अननोन कॉल या मैसेज की जानकारी तुरंत साइबर को कॉल कर रिपोर्ट दर्ज करे|

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