संसद का मॉनसून सत्र हंगामों में बहा, 80% समय बाधित; राहुल गांधी बोले- मोदी की नींद उड़ा दी, बीजेपी ने बताया विपक्ष की हार

नई दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र शुक्रवार को भारी हंगामे और विरोध के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। पूरे सत्र में लोकसभा और राज्यसभा की निर्धारित कार्यवाही का करीब 80 फीसदी समय व्यवधान की भेंट चढ़ गया। करीब 114 घंटे की निर्धारित कार्यवाही में लोकसभा के 96 घंटे से ज्यादा और राज्यसभा के करीब 77 घंटे विरोध और हंगामे में बीते। इस दौरान सरकार ने 12 विधेयक पारित कराए, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन सांसदों को हुआ, जो अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे और सदन में गंभीर चर्चा करना चाहते थे। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने संसद में सरकार के कामकाज को रोकने को विपक्ष की रणनीति की सफलता बताया। बीजेपी ने इसके उलट इसे विपक्ष की रणनीतिक भूल और नुकसानदेह कदम करार दिया।

आखिरी दिन भी नारेबाजी, फिर सिर्फ वंदे मातरम् का गायन

सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत एनडीए के कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद थे। सुबह 11 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सदन में पहुंचने के बाद विपक्षी सांसदों ने करीब एक मिनट तक नारेबाजी की। इसके बाद सभी सांसद वंदे मातरम् के गायन के लिए खड़े हुए।

करीब 3 मिनट 10 सेकेंड में छह छंदों का गायन पूरा हुआ और इसके तुरंत बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सिर्फ वंदे मातरम् के गायन के लिए सदन में आए। उनका कहना था कि अगर सरकार पहले सदन में आकर बयान देती तो शायद इतना हंगामा नहीं होता।

संसद परिसर में बंदर के खिलौने लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के कुछ सांसदों ने संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन किया। राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने इसका नेतृत्व किया। उनके हाथ में बंदर का खिलौना था और कुछ अन्य सांसद भी खिलौने लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की गई। समाजवादी पार्टी के कुछ सांसद भी प्रदर्शन में शामिल हुए।

करीब 10 से 15 मिनट बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया। बीजेपी ने इसे संसद की गरिमा और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रदर्शन की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस सांसद इस तरह के प्रदर्शन से अपने नेता को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी को अपरिपक्व, अनुशासनहीन, उद्दंड और अहंकारी बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी को संसदीय परंपराओं और संसद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

राहुल गांधी का दावा- मोदी की नींद उड़ा दी, शाह पर भी साधा निशाना

बीजेपी की आलोचनाओं के बीच राहुल गांधी ने शाम को कांग्रेस के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। ‘रचनात्मक सम्मेलन’ में उन्होंने मोदी, शाह और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की नींद उड़ा दी है।

राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्होंने अमित शाह पर भी इतना दबाव बना दिया है कि वह संसद में आने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। उन्होंने दावा किया कि जब तक प्रधानमंत्री मोदी इस्तीफा नहीं देते और अमित शाह की कुर्सी नहीं जाती, तब तक वह उन्हें चैन से सोने नहीं देंगे।

बीजेपी की प्रतिक्रिया सीमित, कांग्रेस के भीतर से भी उठे सवाल

राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं आई। उत्तर प्रदेश के मंत्री एके शर्मा ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी समझ को लेकर देश में पहले से धारणा बनी हुई है और इसी वजह से लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते।

हालांकि, संसद में हुए प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस के भीतर से भी असहमति सामने आई। कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद लोकतंत्र का सामान्य हिस्सा हैं और विरोध भी होना चाहिए, लेकिन उसकी एक न्यूनतम मर्यादा होनी चाहिए।

पवन खेड़ा के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि वह इस तरीके से सहमत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान वह अपनी राय रखेंगे।

करीब 114 घंटे का कामकाज तय था, ज्यादातर समय हंगामे में गुजरा

सत्र के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा में करीब 114 घंटे कामकाज होना निर्धारित था। लोकसभा में 96 घंटे से अधिक समय हंगामे और व्यवधान में चला गया, जबकि राज्यसभा में भी करीब 77 घंटे विरोध के कारण बाधित रहे।

बीजेपी का कहना है कि सदन की कार्यवाही रोककर विपक्ष ने अपना ही नुकसान किया। सरकार जिन विधेयकों को पारित कराना चाहती थी, उनमें से 12 पारित हो गए, लेकिन विपक्ष को उन पर विस्तार से चर्चा करने, कमियां सामने रखने और अपने सुझाव रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह पहली बार देखने को मिला कि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष चर्चा से पीछे हट रहा था।

राहुल गांधी ने बताया रणनीति की सफलता, बीजेपी ने कहा- विपक्ष ने मौका गंवाया

राहुल गांधी ने संसद में सरकार के कामकाज को बाधित करने को विपक्ष की रणनीति की सफलता बताया। उनका दावा है कि विपक्ष के दबाव के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ने में मुश्किल हुई।

बीजेपी का तर्क इसके ठीक उलट है। पार्टी का कहना है कि संसद में कार्यवाही रोकना विपक्ष की जीत नहीं, बल्कि रणनीतिक हार है। सवाल यह भी उठाया गया कि यदि सरकार के विधेयकों पर बहस नहीं हुई तो विपक्ष ने अपनी बात सदन के भीतर रखने का अवसर क्यों गंवाया।

खास तौर पर प्रश्नकाल विपक्षी सांसदों के लिए सरकार से जवाब मांगने का अहम माध्यम होता है। इसके जरिए सांसद अपने क्षेत्रों की समस्याएं मंत्रियों के सामने उठा सकते हैं और सरकार पर जवाब देने का दबाव बना सकते हैं। अब सत्र समाप्त होने के बाद उनके सामने अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनता को जवाब देने की चुनौती भी रहेगी।

vineet verma

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