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पंजाब की गलियों से लेकर कनाडा तक… गैंगस्टर गोल्डी बरार का सफर, जब एक कांस्टेबल का बेटा बना अंडरवर्ल्ड का सबसे खतरनाक चेहरा!

हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी के घर पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी लेने वाला गैंगस्टर गोल्डी बरार कभी पंजाब के एक छोटे से कस्बे की तंग गलियों में खेलने वाला साधारण-सा लड़का था. वो कनाडा पढ़ाई के बहाने जाता है और वहां से लौटकर बन जाता है अंतरराष्ट्रीय अपराध जगत का सबसे डरावना नाम. यह कहानी है सतिन्दरजीत सिंह उर्फ़ गोल्डी बरार की, जिसकी ज़िंदगी किसी बॉलीवुड क्राइम-थ्रिलर से कम नहीं लगती.

श्री मुक्तसर साहिब ज़िले के बराड़ कस्बे में जन्मे गोल्डी के पिता, शमशेर सिंह बरार, पंजाब पुलिस में असिस्टंट सबइंस्पेक्टर थे. एक ओर पिता क़ानून की रक्षा करने वाले सिपाही थे, तो दूसरी ओर बेटा धीरे-धीरे क़ानून को चुनौती देने वाली दुनिया में उतर रहा था. किस्मत का खेल देखिए—जिस घर का मुखिया पुलिस की वर्दी पहनता था, उसी घर का बेटा खून-खराबे, गैंगवार और रंगदारी के रास्ते पर निकल पड़ा.

कनाडा में स्टूडेंट वीज़ा पर पढ़ाई करने पहुँचे गोल्डी ने कुछ ही समय में अपराध की दुनिया में कदम रख देता है.जल्द ही वह हथियारों की तस्करी, सुपारी किलिंग और रंगदारी वसूली में उतरता है और इसी के साथ, वह कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का सबसे भरोसेमंद साथी बनकर दुनिया के सामने आता है. पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज सैकड़ों पन्नों में उसका नाम आज खौफ़ और रहस्य दोनों का प्रतीक बन चुका है.

कॉलेज लाइफ से शुरू हुआ बरार के खूनी अपराधों का सिलसिला

बरार के अपराधों का सिलसिला उसके कॉलेज लाइफ से ही शुरू हो जाता है. 2012 में, जब वह मात्र 18 साल का था, तब दो गुटों के बीच हुए झगड़े में उसके ऊपर आईपीसी की धारा 336 (दूसरों की ज़िंदगी या व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरे में डालना) के तहत केस दर्ज होता है. लेकिन बाद में वह इस केस से बरी हो जाता है.

वह मार-पीट तक ही नहीं रूकता, इसके बाद उसका नाम मर्डर में भी आता है. 2015 में उस पर मुक्तसर में हत्या का मामला दर्ज होता है, लेकिन अदालत के बाहर समझौता होने के बाद वह बरी हो जाता है. बाद में फ़ाज़िल्का ज़िले में उसके ख़िलाफ़ दो और मामले भी दर्ज किए जाते हैं. इसके बाद 2017 में वह पढ़ाई के लिए कनाडा जाता है, पर इससे पहले ही बरार के ऊपर चार मामले दर्ज हो चुके थे.

पढ़ाई के बहाने अपराध की दुनिया से जुड़ाव

उसके खूनी अपराधों की कहानी की शुरुआत 2017–18 में होती है, जब बरार पढ़ाई के लिए कनाडा पहुंचता है. वहां किताबों और क्लासरूम से ज़्यादा उसे भाने लगा अंडरवर्ल्ड का अंधेरा. धीरे-धीरे गोल्डी बराड़ फोन कॉल और सोशल मीडिया के जरिये रंगदारी वसूली, नशे की तस्करी और हथियारों के सौदे का खिलाड़ी बनता चला गया. यहीं उसकी मुलाक़ात होती है पंजाब के सबसे खूँखार गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से.

कनाडा में बैठा यह युवक अचानक अपराध की दुनिया का नया चेहरा बन गया—जहां हर कॉल मौत का पैग़ाम बनकर जाती थी और हर सौदा खून से लिखी हुई कहानी. देखते ही देखते गोल्डी बराड़ अपराध के ऐसे दलदल में धँस गया, जहां से निकलना नामुमकिन था और आगे का रास्ता सिर्फ़ लाशों, गोलियों और खून से होकर गुजरना था.

कांग्रेस नेता की हत्या से सुर्खियों में आया नाम

इसके बाद 2020 में फरीदकोट में यूथ कांग्रेस नेता गुरलाल पहलवान की हत्या ने बरार का नाम सुर्खियों में ला दिया. इस मर्डर को लेकर पुलिस की जांच में आया कि इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि कनाडा में बैठा गोल्डी बरार था. यहीं से उसके खौफनाक अपराधों का सिलसिला तेज़ रफ्तार पकड़ लेता है.

2022: वो दिन जिसने पंजाब हिला दिया

29 मई 2022, पंजाब के मानसा जिले में मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है. मूसेवाला की हत्या ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था. लेकिन सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कुछ ही घंटों बाद कनाडा से गोल्डी बरार ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए सोशल मीडिया पर खुलेआम कहा कि यह हत्या “पुरानी दुश्मनी” का नतीजा है. गोल्डी बरार के इस बयान के बाद वह रातों-रात भारत का “गैंगस्टर नंबर 1 ” बन जाता है.

भारत सरकार ने किया आतंकवादी घोषित

मूसेवाला हत्याकांड के बाद भारत सरकार ने गोल्डी बरार को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया. इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया और पंजाब पुलिस ने उसे मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल कर लिया. लेकिन बरार  कनाडा से बच निकलने में कामयाब रहा और फिर खबरें आईं कि वह अमेरिका में छिपा हुआ है.

2024 में खबरें आई कि अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में गोल्डी बरार को गोली मार दी गई. सोशल मीडिया पर यह खबर आग की तरह फैली, लेकिन बाद में अमेरिकी पुलिस ने पुष्टि की कि मृतक गोल्डी बरार नहीं कोई और व्यक्ति था.

आज अमेरिका की जमीन पर बैठा गोल्डी बरार अंतरराष्ट्रीय अपराध जगत का मास्टरमाइंड बन चुका है. भारत सरकार ने उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया है, लेकिन इसके बावजूद वह वहीं से अपने नेटवर्क को धागों की तरह खींच रहा है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग का यह खास खिलाड़ी वीडियो कॉल और एन्क्रिप्टेड चैट के जरिये रंगदारी, सुपारी किलिंग और हथियारों के सौदों को अंजाम देता है. इस समय उसके खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास समेत 50 से ज़्यादा केस दर्ज हैं. इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के बावजूद, बरार का नाम अब भी गैंगवार और खून-खराबे का पर्याय बना हुआ है.

news desk

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