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सोना $5,000 और चांदी $125 तक… रिकॉर्ड रैली के बीच  70–80% क्रैश का डर क्यों सता रहा है ?

सोना और चांदी सदियों से निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश माने जाते रहे हैं। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, मुद्रास्फीति का डर गहराता है या कागजी मुद्रा पर भरोसा कमजोर पड़ता है, तब ये कीमती धातुएं सबसे ज्यादा चमकती हैं। साल 2026 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। सोना $4,000 के पार निकल चुका है और चांदी $90 से ऊपर पहुंच गई है। यह रैली ऐतिहासिक जरूर है, लेकिन इतिहास खुद यह भी बताता है कि ऐसी तेजी के पीछे बड़े खतरे छिपे होते हैं।

अगर पीछे जाएं तो 1980 का दौर सबसे बड़ा सबक देता है। 1970 के दशक में अमेरिका मुद्रास्फीति, तेल संकट और डॉलर को गोल्ड स्टैंडर्ड से अलग करने जैसी घटनाओं से गुजर रहा था। इस माहौल में सोना $35 से उछलकर $850 तक पहुंच गया, जबकि चांदी $4 से $50 हो गई। लेकिन जैसे ही बाजार में स्पेकुलेशन हावी हुआ, ‘सिल्वर थर्सडे’ आया और चांदी एक झटके में करीब 50% टूट गई। कुल मिलाकर चांदी 89% और सोना 60% से ज्यादा गिरा। यह साफ करता है कि जब लालच चरम पर पहुंचता है, तो एक छोटा सा नीतिगत बदलाव पूरी रैली को पलट सकता है।

2008 के बाद की रैली और 2011 का झटका

2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद केंद्रीय बैंकों की ढीली मौद्रिक नीतियों और क्वांटिटेटिव ईजिंग ने सोने-चांदी को नई रफ्तार दी। सोना $700 से बढ़कर 2011 में $1,900 तक पहुंचा और चांदी $49 के करीब आ गई। लेकिन जैसे ही अर्थव्यवस्था संभलने लगी और फेड ने सख्ती के संकेत दिए, दोनों धातुएं फिसल गईं। सोना करीब 45% और चांदी लगभग 72% तक टूट गई।

2026 की तेजी: मौके भी, खतरे भी

2026 में मौजूदा तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं—अमेरिका पर बढ़ता कर्ज, भू-राजनीतिक तनाव, AI और ग्रीन एनर्जी का बूम और केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी। गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन जैसे संस्थान सोने को $5,000+ तक जाते देख रहे हैं। वहीं चांदी को इंडस्ट्रियल डिमांड और घटती सप्लाई का सपोर्ट मिल रहा है, जिससे $100–$125 तक के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, खतरे भी उतने ही बड़े हैं। बाजार ओवरबॉट जोन में है, स्पेकुलेशन बढ़ चुका है और अगर ब्याज दरें बढ़ीं या अर्थव्यवस्था मजबूत हुई, तो 70–80% तक का सुधार भी संभव है। इसलिए निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है धैर्य और संतुलन। छोटे हिस्सों में निवेश, मार्जिन से दूरी और लंबी अवधि की सोच ही इस चमकदार लेकिन जोखिमभरे सफर में सबसे सुरक्षित रास्ता है।

news desk

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