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राजधानी एक्सप्रेस को क्यों कहा जाता है ‘ट्रेनों का राजा’? 1969 में शुरू हुई इस ट्रेन ने कैसे बदल दिया भारतीय रेल का सफर

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के इतिहास में कुछ ट्रेनें ऐसी हैं, जिन्होंने सिर्फ यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम नहीं किया, बल्कि रेल यात्रा का पूरा अनुभव बदल दिया। राजधानी एक्सप्रेस भी ऐसी ही ट्रेनों में शामिल है। आज वंदे भारत और शताब्दी जैसी आधुनिक ट्रेनें भारतीय पटरियों पर दौड़ रही हैं, लेकिन प्रीमियम रेल सेवा के तौर पर राजधानी एक्सप्रेस की अपनी अलग पहचान बनी हुई है। लाल-पीले रंग के डिब्बों और तेज रफ्तार के लिए पहचानी जाने वाली इस ट्रेन ने भारतीय रेलवे के आधुनिक दौर की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई। आखिर राजधानी एक्सप्रेस की शुरुआत क्यों हुई, इसे यह नाम कैसे मिला और इसे ‘ट्रेनों का राजा’ क्यों कहा जाता है?

1969 में पहली बार दौड़ी राजधानी, रफ्तार ने बनाया रिकॉर्ड

भारत में पहली राजधानी एक्सप्रेस 1 मार्च 1969 को नई दिल्ली से हावड़ा के बीच रवाना हुई थी। उस समय देश में ज्यादातर ट्रेनें करीब 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलती थीं। ऐसे दौर में पहली राजधानी एक्सप्रेस ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की और रेल यात्रा की गति का नया मानक कायम किया।

नई दिल्ली और हावड़ा के बीच करीब 1450 किलोमीटर की दूरी इस ट्रेन ने महज 17 घंटे 20 मिनट में पूरी की। उस समय के लिहाज से यह उपलब्धि काफी बड़ी थी और इसने लंबी दूरी की रेल यात्रा को लेकर यात्रियों की सोच बदल दी।

आखिर ‘राजधानी’ नाम ही क्यों रखा गया?

राजधानी एक्सप्रेस के नाम के पीछे वजह काफी सीधी है। इस प्रीमियम ट्रेन सेवा को देश की अलग-अलग राज्यों की राजधानियों को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

राज्यों की राजधानियों से नई दिल्ली तक तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराने के मकसद से इसका नाम ‘राजधानी एक्सप्रेस’ रखा गया। समय के साथ इसका नेटवर्क भी बढ़ता गया और आज मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, पटना और अहमदाबाद जैसी प्रमुख राजधानियों से नई दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस सेवाएं संचालित होती हैं।

आम ट्रेनों से कैसे अलग है राजधानी एक्सप्रेस?

राजधानी एक्सप्रेस को शुरुआत से ही प्रीमियम और तेज रफ्तार ट्रेन सेवा के तौर पर तैयार किया गया। यह पूरी तरह वातानुकूलित ट्रेन है और इसमें सामान्य या स्लीपर श्रेणी के डिब्बे नहीं होते। इसमें फर्स्ट एसी, 2-टियर एसी और 3-टियर एसी कोच शामिल होते हैं।

यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। पेंट्री कार के जरिए सूप, नाश्ता, चाय, दोपहर और रात का खाना उपलब्ध कराया जाता है। इन सुविधाओं का खर्च टिकट के किराए में ही शामिल होता है।

राजधानी एक्सप्रेस के स्टॉपेज भी आम यात्री ट्रेनों की तुलना में कम रखे जाते हैं। यह मुख्य और महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ही ठहरती है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में समय की बचत होती है।

पटरियों पर राजधानी को क्यों मिलती है प्राथमिकता?

राजधानी एक्सप्रेस की खास पहचान इसकी प्राथमिकता वाली सेवा भी रही है। ट्रेन को समय पर गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रेलवे नियंत्रण कक्ष इसकी निगरानी करता है। रास्ते में देरी होने पर इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है।

इसी वजह से जब राजधानी एक्सप्रेस किसी रेल मार्ग पर चलती है तो कई बार अन्य ट्रेनों और मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए अलग लाइन पर रोका जाता है। यही व्यवस्था इसकी तेज और अपेक्षाकृत समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित करने में मदद करती है।

LHB कोच ने बढ़ाई सुरक्षा और आधुनिकता

समय के साथ राजधानी एक्सप्रेस के डिब्बों में भी बदलाव किया गया। अब सभी राजधानी ट्रेनों को जर्मन तकनीक पर आधारित एलएचबी यानी लिंक हॉफमैन बुश कोच में अपग्रेड कर दिया गया है।

इन कोचों की एक प्रमुख विशेषता एंटी-टेलिस्कोपिक डिजाइन है। इसका मतलब है कि हादसे की स्थिति में एक डिब्बे के दूसरे डिब्बे के ऊपर चढ़ने की आशंका को कम करने के लिए इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है। रेड-सिल्वर रंग के ये आधुनिक कोच राजधानी एक्सप्रेस की पहचान का हिस्सा बन चुके हैं।

फिर ‘ट्रेनों का राजा’ क्यों कहलाती है राजधानी?

राजधानी एक्सप्रेस को लंबे समय से ‘किंग ऑफ द ट्रैक्स’ यानी ‘ट्रेनों का राजा’ कहा जाता रहा है। इसके पीछे इसकी रफ्तार, कम ठहराव, वातानुकूलित सुविधा, भोजन सेवा और रेलवे नेटवर्क पर मिलने वाली प्राथमिकता जैसे कई कारण बताए जाते हैं।

जब राजधानी एक्सप्रेस की शुरुआत हुई थी, तब इसमें सफर करना प्रीमियम रेल यात्रा से जुड़ा अनुभव माना जाता था। बेहतर भोजन, अटेंडेंट की सेवा, साफ-सुथरे केबिन और आरामदायक यात्रा ने इसे दूसरी सामान्य ट्रेनों से अलग पहचान दी।

तेज गति और लंबी दूरी की यात्रा में समय बचाने की क्षमता ने भी इसकी प्रतिष्ठा मजबूत की। दशकों तक राजधानी एक्सप्रेस ने देश के प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय राजधानी के बीच तेज रेल संपर्क की अहम भूमिका निभाई।

आज भारतीय रेलवे में हाई-स्पीड और आधुनिक ट्रेनों का दौर आगे बढ़ चुका है, लेकिन राजधानी एक्सप्रेस भारतीय रेल के उस दौर की महत्वपूर्ण पहचान बनी हुई है, जब तेज, सुरक्षित और आरामदायक लंबी दूरी की रेल सेवा को एक नई दिशा मिली थी। यही ऐतिहासिक भूमिका और इसकी प्रीमियम सुविधाएं इसे आज भी भारतीय रेल की सबसे चर्चित ट्रेनों में शामिल रखती हैं।

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