जयपुर: राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी अस्पताल में सीजेरियन प्रसव कराने वाली पांच महिलाओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर तत्काल किडनी प्रत्यारोपण की मांग की है। महिलाओं का आरोप है कि इलाज के दौरान कथित लापरवाही और नकली दवाओं के इस्तेमाल से उनकी दोनों किडनियां गंभीर रूप से प्रभावित हो गईं। उन्होंने कहा है कि यदि समय पर किडनी प्रत्यारोपण संभव नहीं है, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए क्योंकि लगातार डायलिसिस और असहनीय पीड़ा के साथ जीवन जीना अब संभव नहीं रह गया है।
इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
पत्र लिखने वाली पांचों महिलाओं का 5 से 7 मई के बीच कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन हुआ था। महिलाओं का आरोप है कि उपचार के दौरान हुई कथित लापरवाही और नकली दवाओं के कारण उनकी किडनियों को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिसके बाद वे नियमित डायलिसिस पर निर्भर हो गई हैं।
फिलहाल सभी पांचों महिलाएं अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती हैं।
राष्ट्रपति से लगाई इंसाफ की गुहार
अपने पत्र में महिलाओं ने लिखा है कि उन्होंने प्रशासन और सरकार के सभी स्तरों पर मदद की कोशिश की, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। उन्होंने राष्ट्रपति से तत्काल किडनी प्रत्यारोपण, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पर्याप्त मुआवजा दिलाने की मांग की है।
महिलाओं ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हो सकतीं, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए क्योंकि लगातार दर्द और बीमारी के बीच सम्मानजनक जीवन जीना उनके लिए संभव नहीं रह गया है।
‘मुख्यमंत्री तक पहुंचे, लेकिन नहीं मिला समाधान’
महिलाओं में से एक ने बताया कि उन्होंने कोटा कलेक्टर, कोटा-बूंदी के सांसद और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन उन्हें न तो न्याय मिला और न ही पर्याप्त चिकित्सीय या आर्थिक सहायता।
उन्होंने कहा कि किडनी फेल होने, फेफड़ों में पानी भरने, सांस लेने में तकलीफ और हर 48 घंटे में डायलिसिस की प्रक्रिया ने उनकी जिंदगी बेहद कठिन बना दी है। इलाज के चलते परिवार भी गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, क्योंकि कई महिलाओं के पति उनकी देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़ चुके हैं।
‘अब डायलिसिस नहीं, किडनी ट्रांसप्लांट चाहिए’
पीड़ित महिलाओं में शामिल धन्नी बाई के पति ने बताया कि उनकी पत्नी अब डायलिसिस कराने से डरने लगी हैं। उनका कहना है कि हर डायलिसिस के बाद उन्हें उल्टियां होती हैं और रातभर नींद नहीं आती।
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी पिछले 72 दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं और अब उन्होंने डायलिसिस कराने से इनकार करते हुए केवल किडनी प्रत्यारोपण की मांग की है।
दो महीने में 19 मातृ मृत्यु से बढ़ी चिंता
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पिछले दो महीनों में राजस्थान में प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण कम से कम 19 महिलाओं की मौत हो चुकी है। इनमें कोटा के इसी अस्पताल में पांच, भीलवाड़ा में पांच, बांसवाड़ा में चार और बीकानेर में एक महिला की मौत शामिल है।
इन घटनाओं के बाद राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और राज्य सरकार ने संबंधित मामलों की जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी सफाई
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर ने हालिया मातृ मृत्यु मामलों पर कहा कि सभी मौतें प्रसव संबंधी कारणों से नहीं हुईं। उनके अनुसार, कुछ मामलों में गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं, अत्यधिक रक्तचाप, लीवर संबंधी समस्याएं, हाइपोवोलेमिक शॉक, फुफ्फुसीय थ्रोम्बोएम्बोलिज्म, एचईएलएलपी सिंड्रोम और प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव जैसी गंभीर चिकित्सीय स्थितियां मौत का कारण बनीं।
इसी बीच, बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी सीजेरियन ऑपरेशन के बाद एक माह से अधिक समय तक उपचाररत रही 25 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है।