शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी का जिक्र किया। पुलिस रिस्पॉन्स टाइम पांच मिनट होने और महिला श्रम बल भागीदारी 36 फीसदी से अधिक पहुंचने का दावा किया…
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा के बाद सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने 2017 से पहले के प्रदेश के हालात पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से कानून का राज मजबूत हुआ है और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में काम किया गया है।
मुख्यमंत्री ने मां कालरात्रि के स्वरूप को अधर्म, अत्याचार और आसुरी शक्तियों के विनाश का प्रतीक बताते हुए कहा कि न्याय और भयमुक्त समाज की स्थापना के लिए अन्याय के खिलाफ खड़ा होना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और रोजगार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख किया।
2017 से पहले के यूपी का जिक्र, माफिया और अपराध पर उठाए सवाल
योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में माफिया, दंगाइयों और अपराधियों के आतंक के कारण भय और अराजकता का माहौल था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उस समय की परिस्थितियों का असर महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भर बनने के अवसरों पर भी पड़ता था।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
मिशन शक्ति और 1090 हेल्पलाइन का किया जिक्र
महिला सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से संचालित पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने मिशन शक्ति, 1090 महिला हेल्पलाइन, महिला बीट पुलिसिंग और सेफ सिटी परियोजना को प्रमुखता से गिनाया।
उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को घर, सड़क, शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों पर सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है। महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की रणनीति में पुलिस की सक्रियता और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई को भी अहम बताया गया।
65 मिनट से पांच मिनट हुआ पुलिस रिस्पॉन्स टाइम, CM का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम वर्ष 2016 के 65 मिनट से घटकर अब पांच मिनट रह गया है। उन्होंने इसे पुलिस की तत्परता और कानून-व्यवस्था में सुधार से जोड़कर पेश किया।
हालांकि, इस आंकड़े के संदर्भ में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि रिस्पॉन्स टाइम की गणना किस प्रकार की गई है, इसमें किन आपातकालीन सेवाओं को शामिल किया गया है और यह औसत समय किस अवधि के आंकड़ों पर आधारित है। इन विवरणों के बिना इस दावे की स्वतंत्र तुलना करना मुश्किल है।
महिला श्रम बल भागीदारी 36 फीसदी से ज्यादा होने का दावा
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में महिला श्रम बल भागीदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
उन्होंने कहा कि बेहतर सुरक्षा के माहौल के कारण महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी काम कर रही हैं और कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र तथा उद्यमिता में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती हिस्सेदारी प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है।
इस दावे का आकलन करने के लिए संबंधित वर्षों, श्रम बल भागीदारी के आधिकारिक सर्वेक्षण और इस्तेमाल किए गए आंकड़ों के आधार को देखना जरूरी होगा।
यूपी की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय में तीन गुना वृद्धि का उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में तीन गुना वृद्धि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की अहम भूमिका है।
हालांकि, मुख्यमंत्री के संदेश में आर्थिक वृद्धि की शुरुआत और अंतिम वर्ष, मौजूदा कीमतों या स्थिर कीमतों के आधार तथा संबंधित आंकड़ों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। इसलिए इन दावों की सटीक तुलना के लिए आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों की जांच आवश्यक है।
महिला सुरक्षा के दावों का आकलन कैसे होगा?
मुख्यमंत्री का संदेश महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आर्थिक भागीदारी को सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत करता है। लेकिन इन क्षेत्रों में वास्तविक बदलाव का आकलन करने के लिए सरकारी दावों के साथ अपराध के आधिकारिक आंकड़ों, पुलिस की प्रतिक्रिया के रिकॉर्ड, महिला श्रम बल भागीदारी के सर्वेक्षण और आर्थिक विकास के तुलनात्मक आंकड़ों को भी देखना जरूरी है।
महिला सशक्तीकरण का सवाल केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं है। सुरक्षा, न्याय तक पहुंच, रोजगार के अवसर और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे पहलुओं पर ठोस आंकड़े ही प्रदेश में हुए बदलाव की व्यापक तस्वीर सामने ला सकते हैं।