भारत के मशहूर बाइक टैक्सी स्टार्टअप Rapido की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। नागपुर में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय ‘RTO’ द्वारा किए गए एक अनोखे ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद कंपनी के तीनों को-फाउंडर्स के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। महज 22 रुपए की एक मामूली बाइक बुकिंग ने कंपनी के को-फाउंडर्स, CEO और MD को कानूनी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
यह पूरी कार्रवाई नागपुर सिटी RTO के मोटर वाहन निरीक्षक विशाल मधुकराव भोवते की शिकायत पर हुई है। दरअसल, RTO को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि रैपिडो बिना वैध कमर्शियल परमिट और सरकारी अनुमति के महाराष्ट्र में पेट्रोल से चलने वाली टू-व्हीलर्स का इस्तेमाल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के लिए कर रहा है।
इसकी सच्चाई जानने के लिए RTO अधिकारियों ने खुद एक जाल बिछाया। अधिकारियों ने रैपिडो ऐप खोला और रवि भवन से प्रियदर्शिनी कॉलोनी तक के लिए एक बाइक राइड बुक की, जिसका कुल किराया महज 22 रुपए था। जैसे ही राइडर बाइक लेकर तय लोकेशन पर पहुंचा, अधिकारियों ने उसे रोक लिया।
RTO अधिकारियों द्वारा की गई जांच में सामने आया कि जिस बाइक को पैसेंजर लाने-ले जाने के लिए भेजा गया था, वह एक प्राइवेट गाड़ी थी। नियमों के मुताबिक, बिना किसी वैध कमर्शियल लाइसेंस या परमिट के निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके तुरंत बाद RTO ने उस वाहन को जब्त कर लिया।
RTO का आरोप है कि रैपिडो के पास महाराष्ट्र सरकार या रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से पेट्रोल बाइक टैक्सी संचालित करने की कोई मंजूरी नहीं है। इसके बावजूद कंपनी नियमों को ताक पर रखकर निजी वाहनों के जरिए कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, जिससे न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर लगी है।
इस मामले में नागपुर के सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में ‘रुपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ (रैपिडो की पैरेंट कंपनी) के तीनों को-फाउंडर्स के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(3) और 3(5) के साथ-साथ मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 66, 93, 192A, 193, 199 और आईटी एक्ट (IT Act) की धारा 66(d) के तहत मामला दर्ज किया है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब रैपिडो या अन्य एग्रीगेटर्स कानूनी पचड़े में फंसे हों। भारत के कई राज्यों में निजी दोपहिया वाहनों को टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर सख्त गाइडलाइंस हैं। प्रशासन का मानना है कि कमर्शियल परमिट न होने के कारण किसी दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों को बीमा का लाभ मिलने में भारी दिक्कतें आती हैं।
फिलहाल, पुलिस और परिवहन विभाग इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद अब देखना यह होगा कि रैपिडो महाराष्ट्र में अपने ऑपरेशन्स को जारी रखने के लिए क्या कानूनी रास्ता अख्तियार करता है।
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