विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल हुए राहुल गांधी. (Photo- @INCIndia )
SIR विवाद के बीच फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस तेज कर दी है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है, लेकिन कानून में मिली सुरक्षा के चलते फिलहाल उनकी कुर्सी पर सीधा खतरा नजर नहीं आ रहा है।
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान नए मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाता है। इसी फॉर्म में किए गए कुछ बदलाव अब राजनीतिक और कानूनी विवाद के केंद्र में हैं।
नए फॉर्म में आवेदक से यह जानकारी मांगी जा रही है कि उसका नाम पहले की SIR मतदाता सूची में था या नहीं। अगर नाम नहीं था तो माता-पिता या दादा-दादी अथवा नाना-नानी का नाम पुरानी SIR सूची में था या नहीं, इसकी जानकारी भी देनी होगी।
यही बदलाव विपक्ष के निशाने पर हैं। विपक्ष का आरोप है कि इससे नए मतदाताओं के लिए नाम जुड़वाने की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब SIR पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में फॉर्म-6 के बदलाव को लेकर सवाल उठा। कोर्ट की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर और तीखे सवाल खड़े किए।
इसी के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए लिखा, “ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो, टाइम टू रिजाइन।”
अखिलेश यादव भी चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाते रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं।
विवाद के बीच चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 में किए गए बदलाव मनमाने तरीके से नहीं किए गए, बल्कि पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति के अनुरूप हुई है।
यानी विवाद का मुख्य सवाल अब यह है कि फॉर्म-6 में बदलाव का फैसला किस प्रक्रिया के तहत हुआ और क्या उसमें संवैधानिक तथा कानूनी नियमों का पूरी तरह पालन किया गया।
फिलहाल ऐसा नहीं दिखता। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानून के तहत विशेष सुरक्षा हासिल है। चुनाव आयोग के आधिकारिक फैसलों को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अदालत में चुनौती की प्रक्रिया पर भी विशेष प्रावधान लागू होते हैं।
यही वजह है कि विपक्ष की सड़क से संसद तक की मुहिम के बावजूद तत्काल इस्तीफा या पद से हटाने की स्थिति आसान नहीं है।
विपक्षी दलों की ओर से संसद के अगले सत्र में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात कही जा रही है। हालांकि, ऐसे प्रस्ताव को पारित कराने के लिए संसद में जरूरी संख्या जुटाना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी।
इसलिए फिलहाल SIR विवाद सिर्फ वोटर लिस्ट और फॉर्म-6 तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, CEC की जवाबदेही और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति भी आ गई है।
यही वजह है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और संसद में विपक्ष की रणनीति, दोनों पर नजर रहेगी।
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