जंतर मंतर पर चल रहे लंबे अनशन ने अब गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। शिक्षाविद सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी हालत लगातार बिगड़ने की खबर सामने आई है। इसी बीच उन्हें जबरन अस्पताल ले जाकर इलाज और भोजन देने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि अगर अनशन जारी रहा तो अगले दो दिनों में उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
याचिकाकर्ता ने केंद्र और दिल्ली सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि:
याचिका और आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार:
इन संकेतों को डॉक्टरों ने चिंताजनक बताया है, जबकि मौके पर मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार से अपील की है कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि लोगों की जान से जुड़ा मामला बन चुका है।
नीट पेपर लीक विवाद के बाद शुरू हुए इस आंदोलन में वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। इस बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद तक पदयात्रा का ऐलान किया है, जिससे इस मुद्दे के और तेज होने की संभावना है।
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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