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ईरान पर हमले की चेतावनी: डील नहीं हुई तो पावर प्लांट और पुल होंगे निशाने पर, ट्रंप का बड़ा बयान

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने बातचीत शुरू नहीं की, तो अमेरिका अगले हफ्ते उसके पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बना सकता है।

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि “अगर ईरान बातचीत के लिए आगे नहीं आता, तो हालात और बिगड़ेंगे और कार्रवाई जारी रहेगी।”

4 दिन से जारी हमले, बढ़ा युद्ध का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है। US Central Command (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना लगातार चौथे दिन ईरान से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई कर रही है।

वहीं, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी भी फिर शुरू कर दी गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

ईरान का जवाब: ड्रोन हमले का दावा

ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप के आसपास कई धमाके हुए हैं। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित एक सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है, जहां अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात बताए जा रहे हैं।

नागरिक ठिकानों पर हमले पर विवाद

ट्रंप ने जिन पावर प्लांट्स और जल सुविधाओं को निशाना बनाने की बात कही है, उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नागरिक ढांचे पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा विवाद

दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा टकराव होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है।ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी ने हालिया समझौतों को लगभग बेअसर कर दिया है।

ट्रंप ने वापस लिया ‘गार्जियन फीस’ फैसला

इस बीच ट्रंप अपने एक बड़े फैसले से पीछे हट गए हैं। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क लगाने का ऐलान किया था, जिसे लागू होने से कुछ घंटे पहले ही वापस ले लिया गया।

ट्रंप ने कहा कि यह फैसला मध्य पूर्व के नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद लिया गया, हालांकि ईरान के खिलाफ नाकेबंदी जारी रहेगी।

क्या बढ़ेगा युद्ध?

पिछले कुछ दिनों में हमले और जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। 17 जून को हुआ संघर्ष विराम अब लगभग खत्म माना जा रहा है, जिससे शांति वार्ता की उम्मीदें भी कमजोर पड़ गई हैं।

कूटनीति या टकराव?

अमेरिका की सख्त चेतावनी और ईरान की जवाबी कार्रवाई से साफ है कि हालात बेहद संवेदनशील हो चुके हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश बातचीत का रास्ता चुनते हैं या यह तनाव बड़े सैन्य संघर्ष में बदल जाता है।

news desk

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