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एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने BJP को दिया बड़ा झटका, मेयर पद पर कब्जे के लिए बनाई रणनीति, कांग्रेस भी साथ देने को तैयार

महाराष्ट्र में नगर निगम की मेयर कुर्सी को लेकर सियासी जंग तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में खुलकर रार देखने को मिल रही है। खासकर महायुति के भीतर सहयोगी अपने ही साथी से अलग होकर नए गठबंधन बना रहे हैं, जो राजनीतिक हलकों को हैरान कर रहा है।

बीएमसी मेयर पद को लेकर भी भाजपा और एकनाथ शिंदे के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है। शिंदे लगातार अपनी रणनीति बनाकर बीजेपी को मुश्किल में डालने का प्रयास कर रहे हैं। एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना की योजना है कि वह उल्हासनगर नगर निगम में मेयर की कुर्सी हासिल करे, और इसके लिए शिंदे समीकरणों को नए सिरे से तय कर रहे हैं।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बुधवार को उल्हासनगर नगर निगम में सत्ता पर दावा करने के लिए 40 पार्षदों का एक ग्रुप तैयार किया है।

इस ग्रुप में 36 शिवसेना पार्षद, वंचित बहुजन अघाड़ी के दो और एक स्थानीय गठबंधन के दो पार्षद शामिल हैं। इस तरह के समीकरण से बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर शिंदे कांग्रेस का समर्थन भी ले सकते हैं। इसके लिए कांग्रेस के एक पार्षद से बातचीत की संभावनाएं भी बताई जा रही हैं।

कांग्रेस को बदले में क्या चाहिए?

इसके बदले में कांग्रेस नेताओं को भिवंडी-निज़ामपुर नगर निगम के गठन में शिंदे का समर्थन मिलने की उम्मीद है, जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 78 सदस्यों वाले उल्हासनगर नगर निगम में सत्ताधारी निकाय बनाने के लिए 40 पार्षदों का बहुमत आवश्यक है। हाल ही में हुए निगम चुनावों में भाजपा 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से तीन सीटें कम रह गईं। एकनाथ शिंदे को 36 सीटें मिली हैं। ऐसे में शिंदे वाली शिवसेना अपना मेयर बनाने के लिए रणनीति बदल रही है।

कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका में शिंदे की चाल

कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (KDMC) में भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है। शिंदे गुट की शिवसेना ने यहां मेयर पद पर कब्जा जमाने के लिए राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ गठबंधन किया है।

KDMC में कुल 122 सीटें हैं, और बहुमत के लिए 62 सीटों की जरूरत है। चुनाव परिणामों के अनुसार, शिंदे गुट की शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, भाजपा को 50 सीटें मिलीं, जबकि उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) को 11 सीटें मिलीं। इसके अलावा, MNS को 5, कांग्रेस को 2 और शरद पवार गुट की NCP को 1 सीट मिली है। शिंदे की रणनीति के चलते भाजपा को यहां सत्ता में आने से रोकने की संभावना बढ़ गई है।

news desk

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