नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने (Ethanol Blending) की पॉलिसी पर इन दिनों घमासान मचा हुआ है। 10% से सीधे 20% यानी E20 पेट्रोल को सिर्फ 3 साल में अनिवार्य करने के बाद, अब सरकार के अगले कदम—E25 पेट्रोल (25% इथेनॉल ब्लेंडिंग)—पर ब्रेक लगने की खबरें आ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में हो रहे विरोध और वाहन चालकों की शिकायतों के बाद सरकार बैकफुट पर आ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, एक हाई-लेवल मीटिंग में यह फैसला लिया गया है कि E25 को बिना पुख्ता वैज्ञानिक परीक्षण और ऑटोमोबाइल्स कंपनियों की पूरी तैयारी के लागू नहीं किया जाएगा।
सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक, E20 पेट्रोल का भारी विरोध हो रहा है। वाहन चालकों और एक्सपर्ट्स ने मुख्य रूप से तीन बड़ी चिंताएं उठाई हैं:
इथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू (ऊर्जा क्षमता) शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले कम होती है। खुद पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी माना है कि इथेनॉल मिक्सिंग की वजह से गाड़ियों के माइलेज में मामूली गिरावट आ सकती है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह गिरावट सिर्फ 2% से 4% तक ही है, लेकिन आम जनता को जेब पर इसका सीधा असर महसूस हो रहा है।
इथेनॉल स्वभाव से ‘हाइग्रोस्कोपिक’ (Hygroscopic) होता है, यानी यह हवा से नमी (पानी) सोख लेता है। इसके कारण गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम, रबर पार्ट्स और इंजन के अंदरूनी हिस्सों में जंग (Corrosion) लगने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर 2023 से पहले बनी गाड़ियाँ (जो सिर्फ E10 फ्यूल के लिए बनी थीं), उनमें खराबी की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं।
सर्दियों के मौसम में इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के साथ गाड़ियों को स्टार्ट करने में दिक्कत आती है, क्योंकि इथेनॉल को जलने के लिए पेट्रोल से ज्यादा तापमान की जरूरत होती है।
इस सवाल पर सरकार और देश की दिग्गज कार निर्माता कंपनियों (जैसे Maruti Suzuki, Toyota और Hyundai) का स्टैंड अलग है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग के पीछे सरकार का मकसद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है:
सरकार ने हाल ही में E22 से लेकर E30 तक के ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी की छूट दी थी और BIS (Bureau of Indian Standards) ने इसके मानक तय किए थे, जिससे यह लगा कि E25 जल्द आने वाला है।
लेकिन, हालिया विवाद को देखते हुए सरकार अब “कैलिब्रेटेड और ग्रेडेड” (Calibrated and Graded Approach) तरीका अपनाएगी। यानी, जब तक ऑटो कंपनियां पूरी तरह से E25 कंपैटिबल इंजन तैयार नहीं कर लेतीं और वाहन चालकों का भरोसा नहीं जीत लिया जाता, तब तक E25 को बाजार में नहीं उतारा जाएगा। सरकार E20 वाली जल्दबाजी को E25 में दोहराने से बचना चाहती है।
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