Highlights
- छत्तीसगढ़ (रायपुर) उपभोक्ता फोरम का ऐतिहासिक फैसला, मारुति सुजुकी को 45 दिन के भीतर नई E20 कंपैटिबल कार देने का आदेश।
- शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹1 लाख और अदालती खर्च के लिए ₹10 हजार का मुआवजा भी मिलेगा।
- संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आया यह फैसला; विपक्ष के ‘E20 एथेनॉल विवाद’ के आरोपों को मिली नई हवा।
E20 Fuel Car Damage Case: देश में पहली बार E20 पेट्रोल पर ऐतिहासिक फैसला
रायपुर। अगर आप भी अपनी कार में धड़ल्ले से E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल) डलवा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! देश में E20 ईंधन के इस्तेमाल से इंजन खराब होने के एक मामले में कोर्ट ने ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर और कार कंपनियों में हड़कंप मचा दिया है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India) को एक तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने साफ निर्देश दिया है कि कंपनी शिकायतकर्ता को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की ब्रांड न्यू E20-फ्यूल कंपैटिबल कार दे, या फिर गाड़ी की पूरी कीमत यानी 20,50,494 रुपये ब्याज समेत वापस करे।
क्या था पूरा मामला? E20 पेट्रोल डालते ही कार बनी सिरदर्द!
दरअसल, यह मामला एक आम कार उपभोक्ता की परेशानी से जुड़ा है, जिसने अपनी चमचमाती नई कार में सरकार द्वारा प्रमोट किए जा रहे E20 पेट्रोल का इस्तेमाल शुरू किया था।
- इंजन हुआ फेल: E20 ईंधन डालने के कुछ ही समय बाद गाड़ी के इंजन में बार-बार खराबी आने लगी।
- मिसफायरिंग की समस्या: गाड़ी की परफॉर्मेंस अचानक गिर गई और इंजन में मिसफायरिंग (Misfiring) जैसी गंभीर तकनीकी दिक्कतें शुरू हो गईं।
- सर्विस सेंटर के चक्कर: उपभोक्ता अपनी कार को बार-बार कंपनी के आधिकारिक सर्विस सेंटर ले गया, लेकिन मैकेनिक और इंजीनियर कई बार मरम्मत करने के बाद भी इस खराबी को जड़ से खत्म नहीं कर पाए।
थक-हारकर पीड़ित उपभोक्ता ने न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद यह ऐतिहासिक फैसला आया है।
अदालत ने खारिज की मारुति की दलील, कहा— ‘जनता के पास दूसरा ऑप्शन नहीं’
सुनवाई के दौरान मारुति सुजुकी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए दलील दी कि उनका यह वाहन E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह उपयुक्त (Compatible) है। कंपनी ने दावा किया कि इंजन की खराबी सामान्य घिसावट (Wear and Tear) या कार के खराब रख-रखाव के कारण हो सकती है।
उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी: अदालत ने कंपनी की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि इस समय देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 पेट्रोल ही उपलब्ध है। ऐसे में आम जनता के पास कोई दूसरा फ्यूल चुनने का विकल्प ही नहीं बचा है। जब उपभोक्ता के पास कोई चॉइस ही नहीं है, तो नए ईंधन से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी से कंपनियां पल्ला नहीं झाड़ सकतीं।
सियासी गलियारों में मचेगा तहलका: जयराम रमेश के आरोपों को मिला बल!
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर “E20 एथेनॉल घोटाले” का सीधा आरोप मढ़ा है। विपक्ष का दावा है कि बिना पूरी तैयारी और गाड़ियों की टेस्टिंग के, देश में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को जबरन थोपा जा रहा है। अब उपभोक्ता अदालत के इस फैसले के बाद, संसद के मानसून सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार और भारी उद्योग मंत्रालय (Heavy Industries Ministry) को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है।