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देश भर में पकड़े गए ड्रग्स की खेप में से सबसे ज्यादा गुजरात में हुए बरामद, चिंतित करने वाला है गृह मंत्रालय का डेटा.

भारत में ड्रग्स की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए शुरू से चुनौती भरी रही है. अक्सर ड्रग्स तस्करी और पुलिस की कार्रवाई की खबरें भी सामने आती रही है. ऐसे में मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सदन में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े दिए गए. जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर साल 2000 से लेकर 2024 के बीच कुल 11,300 करोड़ मूल्य के अवैध ड्रग्स को ज़ब्त किया गया. इस जब्ती का सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 65% गुजरात के अलग अलग पोर्ट्स से हुआ.

गुजरात में कहां मिले कितने ड्रग्स?

वहीं पिछले पांच सालों में गुजरात के 5 बंदरगाहों से 5000 किलो अवैध ड्रग्स पकड़े गए. जिनकी मूल्य लगभग 7,383 करोड़ रुपये की आंकी गई. गौरतलब है कि इनमें से ज़्यादातर मामले गुजरात के प्राइवेट पोर्ट्स से जुड़े हैं. सबसे ज़्यादा बरामदगी मुंद्रा स्थित अदाणी पोर्ट से हुई जहां 6,386 करोड़ रुपये का माल ज़ब्त किया गया. इसके अलावा पिपावाव पोर्ट (180 करोड़), कंटेनर फ़्रेट स्टेशन, मुंद्रा (377 करोड़) और गांधीधाम कंटेनर फ़्रेट स्टेशन (302 करोड़) पर भी बड़े पैमाने पर ड्रग्स पकड़े गए.

देश में जब्त हुए कितने ड्रग्स?

मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर भी बड़ी कार्रवाई हुई, जहां 2,284 करोड़ रुपये का नशीला सामान पकड़ा गया. तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित वीओ चिदंबरनार पोर्ट से लगभग 1,515 करोड़ रुपये और कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट से 78 करोड़ रुपये मूल्य के ड्रग्स बरामद किए गए.

इन कार्रवाइयों में, कस्टम विभाग, गुजरात एटीएस, महाराष्ट्र पुलिस और दिल्ली पुलिस जैसी एजेंसियों ने मिलकर काम किया. बरामद हुए नशे में मुख्य रूप से हेरोइन, कोकीन, मेथामफेटामीन और ट्रामाडोल की गोलियां व इंजेक्शन शामिल थे.

केंद्र सरकार ने बताया कि इन ड्रग बरामदगी मामलों में अब तक कम से कम 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें सर्विन एक्सपोर्ट्स, संधू एक्सपोर्ट्स और एक कस्टम हाउस एजेंट (CHA) के प्रोपराइटर्स शामिल हैं, जो जवाहरलाल नेहरू पोर्ट मामले से जुड़े हैं. इसी तरह मुंद्रा स्थित अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) में दर्ज मामलों में अहमदाबाद की पैसिफिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड, नई दिल्ली की कॉनट्रांस शिपिंग प्रा. लि. और गांधीधाम की सार्थी शिपिंग कंपनी लिमिटेड जैसे तीन कस्टम ब्रोकरों पर भी कार्रवाई की गई है. कुल मिलाकर इस अवधि में 19 मामले दर्ज हुए हैं, जो फिलहाल अलग-अलग चरणों में जांच और अदालत की कार्रवाई से गुजर रहे हैं.

भरत में ड्रग्स व्यापार का फैलता जाल?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB और भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2018 में अवैध ड्रग्स के लगभग 49,450 मामले दर्ज हुए और 60,156 लोग गिरफ्तार हुए. वहीं 2022 में आंकड़े बढ़कर 1,02,769 मामले और 1,26,516 गिरफ्तारियां हो गईं, यानी इन पांच सालों में ड्रग्स से जुड़े मामले और गिरफ्तारी लगभग दोगुनी हो गई.

ड्रग्स का व्यापार वैसे तो पूरी दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों के लिए चिंता का विषय रहा है. ऐसे में भारत में ड्रग्स के व्यापार, खपत और तस्करी के बढ़ते मामले डराने वाले हैं.

news desk

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