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‘मुझे नियम मत सिखाइए’: राज्यसभा में खरगे और किरेन रिजिजू के बीच तीखी नोकझोंक

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में उस वक्त तीखा सियासी ड्रामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच नियमों और बोलने के अधिकार को लेकर जोरदार बहस छिड़ गई।

छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से वक्तव्य की मांग कर रहे खरगे पर जब संसदीय कार्य मंत्री ने सवाल उठाए, तो खरगे ने तीखे लहजे में जवाब दिया— “क्या अब मुझे रिजिजू से नियम सीखने पड़ेंगे?”

बहस की मुख्य वजह: गृह मंत्री के बयान की मांग और नियमों का पेच

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आकर इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात रखें।

इस पर किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष किसी नियम का हवाला दिए बिना मांग रख रहे हैं और वह सरकार या पीठ को यह निर्देश नहीं दे सकते कि सदन में कौन सा मंत्री जवाब देगा। रिजिजू ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अपने नए सदस्यों को बोलने का मौका नहीं दे रहा है।

खरगे का पलटवार: ‘संसदीय अधिकार और अरुण जेटली का हवाला’

रिजिजू के बयानों पर कड़ा एतराज जताते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा:

“नियम मैं भी अच्छी तरह जानता हूं। यह मेरा अधिकार है कि मैं सदन में क्या बोलूं और कब बोलूं। क्या मैं सरकार के दिए विषय पर बोलूंगा? सरकार लगातार जनहित के मुद्दों से भाग रही है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।”

खरगे ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत अरुण जेटली के उस प्रसिद्ध वक्तव्य का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “संसद में व्यवधान डालना भी कभी-कभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है।” इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में राज्यसभा पहुंचे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बचाव करते हुए कहा कि बिना पूर्व सूचना के किसी सदस्य पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नियमों के विपरीत है।

सभापति का निर्देश: ‘गृह मंत्री तक पहुंचाएं विपक्ष की भावनाएं’

दोनों पक्षों के बीच बढ़ते हंगामे के बीच राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने हस्तक्षेप किया। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया कि वह विपक्ष की मांग और भावनाओं से गृह मंत्री अमित शाह को अवगत कराएं।

हालांकि, इस नोकझोंक और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार ने इसे सदन का समय बर्बाद करने का प्रयास बताया।

news desk

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