उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव सिर्फ बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के गणित तक सीमित नहीं है। इस चुनाव का सीधा असर बहुजन समाज पार्टी के संसदीय प्रतिनिधित्व पर भी पड़ने वाला है। 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में यूपी की 10 सीटों के साथ उत्तराखंड की एक और पश्चिम बंगाल की एक राज्यसभा सीट पर भी मतदान होगा।
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है। इनमें बीजेपी के आठ सांसद बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बीएल वर्मा और डॉ. दिनेश शर्मा शामिल हैं। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम का कार्यकाल भी इसी तारीख को खत्म होना है।
डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर 2026 तक था, लेकिन अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके कारण उनकी सीट पहले ही रिक्त हो गई और अब चुनाव प्रक्रिया में यह सीट भी शामिल है।
राज्यसभा सदस्यों का चुनाव संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली से करते हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 403 है। विधानसभा में मौजूदा रिक्तियों को देखते हुए इस चुनाव में उपलब्ध विधायकों की संख्या 397 बताई जा रही है। राज्यसभा चुनाव में सीट जीतने के लिए आवश्यक वोटों का गणित विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या के आधार पर तय होता है।
यही गणित बहुजन समाज पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के पास फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। ऐसे में अपने मौजूदा राज्यसभा सांसद रामजी गौतम के कार्यकाल के बाद पार्टी के लिए उसी सीट पर वापसी करना बेहद कठिन गणित बन जाता है।
रामजी गौतम नवंबर 2020 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। उनके कार्यकाल के बाद अगर बसपा नया राज्यसभा सदस्य नहीं भेज पाती है, तो उच्च सदन में पार्टी का मौजूदा प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बसपा का लोकसभा में भी कोई सांसद नहीं है। ऐसे में राज्यसभा की यह सीट पार्टी के संसदीय प्रतिनिधित्व का एकमात्र हिस्सा है। रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होने के बाद दोनों सदनों में बसपा का कोई निर्वाचित सांसद नहीं रह सकता है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में 16 अक्टूबर का राज्यसभा चुनाव विधानसभा में मौजूद मौजूदा राजनीतिक संख्या के आधार पर होने वाला अहम चुनाव है। हालांकि इसका परिणाम सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का नतीजा तय नहीं करता, लेकिन यह यूपी की मौजूदा विधानसभा में दलों की संख्या और राज्यसभा सीटों के बीच संबंध को सामने रखेगा।
यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी। 6 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख होगी, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख तय है। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी।
इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर कौन-कौन से दल कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं और क्या बसपा अपने मौजूदा राज्यसभा प्रतिनिधित्व को बरकरार रखने की स्थिति बना पाती है।
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