अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी ड्रोनों और उनके स्पेयर पार्ट्स (पुर्जों) के आयात पर भारी-भरकम नया टैरिफ लागू करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को ध्यान में रखते हुए लिए गए इस फैसले के तहत संवेदनशील श्रेणियों के ड्रोनों पर सीधे 100% टैरिफ लगाया जाएगा।
इस नीति का सीधा असर सिर्फ चीन जैसे विरोधी देशों पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका के करीबी मित्र और सहयोगी देशों पर भी पड़ेगा।
1. किस ड्रोन पर कितना लगेगा टैरिफ? (Tariff Structure)
ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, ड्रोनों की श्रेणी और सुरक्षा जोखिम के आधार पर अलग-अलग टैरिफ दरें तय की गई हैं:
- संवेदनशील ड्रोन (Sensitive Drones): राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अति-संवेदनशील माने जाने वाले ड्रोनों पर 100% एड वेलोरम टैरिफ (उत्पाद के मूल्य के बराबर अतिरिक्त शुल्क) लागू होगा।
- छोटे ड्रोन (Small Drones): व्यावसायिक और सामान्य इस्तेमाल में आने वाले छोटे आकार के ड्रोनों पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा।
- सहयोगी देश (Allied Countries): यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, ताइवान और लिकटेंस्टीन से आने वाले ड्रोनों पर 15% टैरिफ रहेगा।
- ब्रिटेन (UK): ब्रिटेन से आयात किए जाने वाले ड्रोन और संबंधित कलपुर्जों पर 10% टैरिफ निर्धारित किया गया है।
2. क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? (The Real Reason)
व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक (Howard Lutnick) द्वारा पेश की गई एक समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कदम उठाया है।
- विदेशी निर्भरता खत्म करना: जांच में सामने आया कि अमेरिकी बाजार में विदेशी ड्रोन निर्माताओं का दबदबा काफी ज्यादा है और अमेरिका अपनी सप्लाई चेन के लिए दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भर है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम: सप्लाई चेन में विदेशी एकाधिकार से भविष्य में अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्राइवेसी पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
3. कब से लागू होंगी नई दरें? (Implementation Window)
यह नया आदेश तुरंत लागू नहीं होगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ये टैरिफ दरें आधिकारिक घोषणा के 21 दिनों के बाद प्रभावी होंगी।
इस 21 दिन की मोहलत से विदेशी ड्रोन कंपनियों और अमेरिकी आयातकों को अपनी सप्लाई चेन और कीमतों की रणनीति में बदलाव करने का सीमित समय मिलेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस सख्त रुख से साफ है कि वह अमेरिकी बाजार में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना चाहता है।