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क्या टेस्टोस्टेरोन थेरेपी सच में ज़िंदगी अपग्रेड करती है या सेहत के लिए है छुपा खतरा ? जानिए पूरी सच्चाई

पिछले कुछ महीनों में एक दिलचस्प ट्रेंड तेज़ी से उभरा है, खासकर शहरी, कॉरपोरेट और फिटनेस-सर्कल्स में। बातचीत जिम तक सीमित नहीं रही, बल्कि बोर्डरूम, पॉडकास्ट और सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। मुद्दा है  टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, यानी TRT। इसे लेकर जिस तरह का उत्साह और भरोसा दिख रहा है, उसने इसे एक मेडिकल ट्रीटमेंट से ज़्यादा लाइफ-अपग्रेड टूल और ज़िन्दगी बदलने की शक्ल दे दी है।

TRT को आज ऐसे प्रचारित किया जा रहा है मानो यह पुरुषों के लिए एक ऑल-इन-वन समाधान हो, जहाँ  ज्यादा ताकत, ज्यादा एनर्जी, बेहतर फोकस, आत्मविश्वास और बेहतर लाइफ आसानी से मिलती है। कई प्रभावशाली चेहरे, खासकर पॉडकास्ट और सोशल मीडिया की दुनिया से, इसके खुले समर्थक हैं। दावा किया जाता है कि TRT लेने के बाद आदमी खुद को पहले से ज़्यादा शार्प, एक्टिव और अल्फा महसूस करता है। कुछ लोग तो इसे अपने बदले हुए शरीर और बढ़ी हुई प्रोडक्टिविटी का राज़ भी बता रहे हैं।

असलियत थोड़ी ज़्यादा जटिल है। मेडिकल साइंस साफ कहती है कि टेस्टोस्टेरोन एक ज़रूरी हार्मोन है, जो उम्र के साथ पुरुषों में धीरे-धीरे कम होता है। जिन पुरुषों में यह स्तर सामान्य से काफी नीचे चला जाता है और उसके साथ थकान, डिप्रेशन, कम लिबिडो जैसी समस्याएं जुड़ जाती हैं, उनके लिए डॉक्टर की निगरानी में TRT वाकई मददगार हो सकती है। ऐसे मामलों में यह इलाज ज़िंदगी की क्वालिटी सुधार सकता है।

लेकिन चिंता की बात यह है कि TRT अब सिर्फ ज़रूरतमंद मरीजों तक सीमित नहीं रह गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बड़ी संख्या में ऐसे पुरुष भी TRT ले रहे हैं, जिनमें कोई स्पष्ट हार्मोनल कमी नहीं है। वजह है  बेहतर दिखने और बेहतर परफॉर्म करने का दबाव। सोशल मीडिया के दौर में, जहां मसल्स, जवानी और हाइपर-मस्क्युलिनिटी को सफलता से जोड़कर देखा जाता है, TRT एक स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है।

यहीं पर जोखिम शुरू होते हैं। जरूरत से ज्यादा टेस्टोस्टेरोन शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ब्लड क्लॉट्स का खतरा, हाई ब्लड प्रेशर, एक्ने, बाल झड़ना और मूड में चिड़चिड़ापन , ये सब इसके साइड इफेक्ट्स में शामिल हैं। सबसे गंभीर खतरा है पुरुषों में  फर्टिलिटी रेट का प्रभावित होना, क्योंकि बाहर से लिया गया टेस्टोस्टेरोन शरीर के प्राकृतिक उत्पादन को दबा देता है।

TRT को चमत्कारिक दवा समझना गलत और खतरनाक है। इससे न तो हमेशा जवानी लौट आती है और न ही ये कोई शॉर्टकट है। TRT असल में एक मेडिकल इलाज है, जिसे सिर्फ जांच के बाद और डॉक्टर की सलाह में ही लिया जाना चाहिए। बिना जरूरत या बिना निगरानी के इसका इस्तेमाल किया गया, तो जो चीज़ बेहतर ज़िंदगी का वादा करती है, वही आगे चलकर सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

news desk

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