श्रीकृष्ण पर टिप्पणी को लेकर बढ़ा सियासी विवाद, सपा प्रमुख ने यदुवंशियों और रघुवंशियों की भावनाएं आहत होने का लगाया आरोप; यूपी-एमपी और नेपाल सीमा पर नाकाबंदी की भी कही बात
लखनऊ। भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी अब धार्मिक बहस से निकलकर उत्तर प्रदेश की सियासत का नया मुद्दा बन गई है। बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने न सिर्फ शास्त्री के बयान को यदुवंशियों और रघुवंशियों की भावनाओं को आहत करने वाला बताया, बल्कि उत्तर प्रदेश में उनके प्रवेश पर रोक लगाने की मांग भी कर दी है। अखिलेश के इस रुख से विवाद और गहरा गया है।
सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को लेकर की गई टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री को अब न ब्रज में जगह मिलेगी और न अवध में। उन्होंने तंज कसते हुए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर नाकाबंदी का बोर्ड लगाने की बात कही, जिस पर लिखा हो कि ईशनिंदा करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्मभूमि में प्रवेश वर्जित है।

अखिलेश ने नेपाल बॉर्डर तक का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से यदुवंशियों और रघुवंशियों, दोनों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि अब कोई सच्चा रघुवंशी या यदुवंशी उनका स्वागत नहीं करेगा।
सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में नेपाल सीमा का भी जिक्र किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो नेपाल बॉर्डर भी बंद करना पड़ेगा, क्योंकि वहां से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करना ज्यादा आसान पड़ सकता है।
अखिलेश ने यह भी सवाल उठाया कि धर्म और मजहब के बाद अब संप्रदायों को लेकर भी इस तरह की टिप्पणियां की जा सकती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी बाहरी ताकत का हाथ हो सकता है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में किसी की राजनीतिक और धार्मिक सत्ता को चुनौती देने के लिए बाहरी इशारों पर माहौल बनाया जा रहा है।
क्या था धीरेंद्र शास्त्री का बयान?
दरअसल, विवाद की शुरुआत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक कथावाचन के दौरान दिए गए बयान से हुई। इसमें उन्होंने भगवान श्रीराम को सीधा और भगवान श्रीकृष्ण को टेढ़ा बताया था। इसी टिप्पणी को लेकर सवाल उठने लगे और धार्मिक-सामाजिक हलकों में नाराजगी सामने आई।
इसके बाद अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर लगातार प्रतिक्रिया दी। सपा प्रमुख ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
धार्मिक टिप्पणी से सियासी टकराव तक पहुंचा मामला
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ दे दिया है। ब्रज और अवध का उल्लेख करते हुए सपा अध्यक्ष ने इस मुद्दे को यदुवंशी और रघुवंशी समाज की भावनाओं से जोड़ा है।
अब देखना होगा कि इस बयान पर धीरेंद्र शास्त्री की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू होता है। फिलहाल, भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी को लेकर यूपी की सियासत में हलचल तेज हो गई है।