2026 की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर किसी तगड़े ‘फेस-ऑफ़’ से कम नहीं है। एक तरफ रणवीर सिंह का रॉ पावर है, तो दूसरी तरफ अगस्त्य नंदा की सादगी। ये सिर्फ दो फिल्मों की टक्कर नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग ‘स्कूल्स ऑफ थॉट’ की बैटल है।
‘धुरंधर’: बॉक्स ऑफिस का असली ‘Monster’
आदित्य धर की ‘धुरंधर’ थिएटर्स में आग लगा रही है। रिलीज हुए एक महीना हो गया है, लेकिन क्रेज ऐसा कि जैसे फिल्म कल ही रिलीज हुई हो। फिल्म ने 750 करोड़ रुपए का बेंचमार्क सेट कर दिया है।
ये फिल्म ‘न्यू इंडिया’ के उस एग्रेसिव राष्ट्रवाद को सेलिब्रेट करती है, जहाँ ‘घर में घुसकर मारना’ सिर्फ एक डायलॉग नहीं, एक इमोशन है। रणवीर सिंह का ट्रांसफॉर्मेशन और हाई-ऑक्टेन एक्शन सीन्स ने फैंस को क्रेजी कर दिया है।
‘इक्कीस’: सादगी में ही असली स्ट्रेंथ है
1 जनवरी को रिलीज हुई श्रीराम राघवन की ‘इक्कीस’ ने पहले दिन 7 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। भले ही ये नंबर्स ‘धुरंधर’ के सामने छोटे लगें, लेकिन फिल्म की चर्चा हर जगह है। ये दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है, और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी व्यूवर्स को इमोशनल कर रही है।
जहाँ ज़्यादातर वॉर मूवीज़ सिर्फ नफ़रत और ज़हर उगलती हैं, ‘इक्कीस’ वीरता के साथ-साथ ह्यूमन इमोशन और इमोशनल गहराई को प्रायोरिटी देती नज़र आए है जो लोगो को खूब पसंद आ रही है।
सोशल मीडिया पर ‘इक्कीस’ के एक डिस्क्लेमर को लेकर काफी मीम्स और चर्चाएं गरम हैं। फिल्म में पाकिस्तान को ‘अनट्रस्टवर्दी’ बताने वाला नोट जोड़ा गया है। लोग इसे ‘धुरंधर इफेक्ट’ कह रहे हैं। गॉसिप गलियारों में चर्चा है कि ‘धुरंधर’ की ब्लॉकबस्टर सफलता को देख ‘इक्कीस’ के मेकर्स थोड़े अलर्ट हो गए। उन्होंने अपनी ‘शांति वाली इमेज’ को थोड़ा बैलेंस करने के लिए ये कड़ा रुख अपनाया है ताकि किसी भी विवाद से बचा जा सके।
मुकाबला दिलचस्प है। क्रिटिक्स का कहना है की अगर आपको रोंगटे खड़े कर देने वाला एक्शन और ‘मैचो’ राष्ट्रवाद पसंद है, तो ‘धुरंधर’ आपकी पहली पसंद है। लेकिन अगर आप युद्ध की कहानियों में दिल और गहराई तलाशते हैं, तो ‘इक्कीस’ आपके लिए बेस्ट साबित हो सकती है। नंबर्स में भले ही रणवीर किंग हों, लेकिन रूह जीतने में श्रीराम राघवन की फिल्म बाजी मार रही है।