मुंबई: कॉमेडी फिल्मों की लोकप्रिय फ्रेंचाइजी ‘धमाल’ एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आई है। निर्देशक इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी ‘धमाल 4’ 10 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी जैसे सितारों से सजी इस फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। फिल्म एक बार फिर खजाने की तलाश, हास्य और भागदौड़ से भरपूर कहानी लेकर आई है। हालांकि, कहानी में नया प्रयोग कम और पुराने अंदाज की झलक ज्यादा देखने को मिलती है। फिल्म की अवधि 143 मिनट है और इसे 5 में से 3 स्टार दिए गए हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
‘धमाल 4’ की शुरुआत एक एनिमेटेड सीक्वेंस से होती है, जिसमें करीब 100 साल पुराने खजाने और उसके खोए हुए नक्शे की कहानी दिखाई जाती है। जब खजाने का नक्शा दोबारा सामने आता है, तो घटनाक्रम ऐसा मोड़ लेता है कि वह नष्ट हो जाता है। इसके बाद कहानी अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी के अलग-अलग किरदारों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।
अजय देवगन का किरदार दो बच्चों की मां को प्रभावित करने की कोशिश करता है, जबकि आदि और मानव की जोड़ी एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में दर्शकों को हंसाने का काम करती है। कहानी में एक ऐसा शख्स भी है जिसके दिमाग में खजाने का पूरा नक्शा दर्ज है। उसके जरिए खजाने तक पहुंचने की नई कड़ी जुड़ती है और सभी किरदार खजाने की तलाश में निकल पड़ते हैं।
फिल्म का अंतिम हिस्सा भावनात्मक मोड़ लेता है, लेकिन पूरी कहानी औसत स्तर की बनी रहती है। फिल्म का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को हल्का-फुल्का मनोरंजन देना है, न कि गंभीर कहानी पेश करना।
कैसा है कलाकारों का अभिनय?
फिल्म में अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रितेश देशमुख और संजय मिश्रा अपनी कॉमिक टाइमिंग से सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। अजय देवगन ने अपने किरदार को सहजता से निभाया है और कुछ दृश्यों में उनके लोकप्रिय अंदाज की झलक भी दिखाई देती है। रवि किशन का अभिनय प्रभाव छोड़ता है, हालांकि कुछ दृश्यों में उनका अभिनय जरूरत से ज्यादा नाटकीय महसूस होता है। बाकी कलाकार भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते नजर आते हैं।
निर्देशन कैसा है और कहां रह गई कमी?
निर्देशक इंद्र कुमार ने इस बार भी फ्रेंचाइजी का वही पुराना फॉर्मूला अपनाया है, जिसमें खजाने की खोज, गलतफहमियां और हास्य का मिश्रण देखने को मिलता है। हालांकि, कहानी में नवीनता की कमी साफ महसूस होती है। कुछ कॉमिक दृश्य असरदार हैं, लेकिन कई जगह हास्य कमजोर पड़ जाता है। कुछ संवाद भी खास प्रभाव नहीं छोड़ते। इसके अलावा फिल्म के कुछ दृश्य प्रभाव भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं लगते।
देखें या नहीं?
अगर आप ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी के प्रशंसक हैं और बिना ज्यादा तर्क-वितर्क के हल्की-फुल्की पारिवारिक कॉमेडी का आनंद लेना चाहते हैं, तो ‘धमाल 4’ आपके लिए मनोरंजक साबित हो सकती है। लेकिन यदि आप कहानी में नएपन, मजबूत पटकथा और तर्कसंगत घटनाक्रम की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।