नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आग लगने की लगातार बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से लेकर 3 जून तक आग से जुड़े हादसों में कम से कम 66 लोगों की जान जा चुकी है। ताजा मामला मालवीय नगर का है, जहां एक रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जिंदगी छीन ली। इस हादसे के बाद राजधानी में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं और भवन सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मालवीय नगर हादसे ने बढ़ाई चिंता
3 जून को मालवीय नगर स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग इस साल की सबसे घातक घटनाओं में शामिल हो गई। हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि राजधानी में व्यावसायिक इमारतों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन कितना प्रभावी ढंग से किया जा रहा है।
जनवरी से जून तक 66 लोगों की गई जान
दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच आग की विभिन्न घटनाओं में 32 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद मई के पहले 27 दिनों में 13 लोगों ने जान गंवाई। मालवीय नगर हादसे में 21 मौतों के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 66 तक पहुंच गया।
मार्च में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज
आंकड़ों के मुताबिक मार्च महीना आग से होने वाली मौतों के लिहाज से सबसे घातक रहा। जनवरी में 6, फरवरी में 6, मार्च में 15 और अप्रैल में 5 लोगों की मौत आग की घटनाओं में हुई। मई में भी कई जानलेवा हादसे सामने आए, जबकि जून की शुरुआत में ही बड़ा अग्निकांड दर्ज हो गया।
गर्मी बढ़ते ही बढ़ीं आग की घटनाएं
दिल्ली में तापमान बढ़ने के साथ आग लगने की घटनाओं में भी तेज उछाल देखने को मिला। जनवरी में 1,396 आग की घटनाएं दर्ज की गईं। फरवरी में यह संख्या 1,096 रही, जबकि मार्च में 1,538 मामलों की सूचना मिली। अप्रैल में घटनाएं बढ़कर 2,663 तक पहुंच गईं।
मई के पहले 26 दिनों में ही अग्निशमन विभाग को 2,877 आग की घटनाओं की कॉल प्राप्त हुईं, जो अप्रैल की तुलना में अधिक थीं। इससे साफ है कि गर्मी के मौसम में राजधानी में आग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सैकड़ों लोग झुलसे, कई को बचाया गया
आग की घटनाओं में केवल मौतें ही नहीं हुईं, बल्कि बड़ी संख्या में लोग झुलसे भी हैं। जनवरी में 41 लोग घायल हुए या उन्हें बचाया गया। फरवरी में यह संख्या 46 रही, मार्च में 68 और अप्रैल में 119 लोग प्रभावित हुए। मई के 26 दिनों तक 99 लोगों के घायल होने या बचाए जाने की जानकारी सामने आई। जून में मालवीय नगर हादसे के बाद यह संख्या और बढ़ने की आशंका है।
कचरे में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ीं
राजधानी में कूड़े और कचरे में आग लगने की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। जनवरी में ऐसी 441 घटनाएं दर्ज हुईं। फरवरी में 331, मार्च में 539 और अप्रैल में 725 मामले सामने आए। 26 मई तक विभाग ने कचरे में आग लगने की 766 शिकायतों पर कार्रवाई की थी।
क्या हैं आग लगने की प्रमुख वजहें?
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने और वातावरण में नमी कम होने के कारण आग लगने का जोखिम बढ़ जाता है। शॉर्ट सर्किट, विद्युत उपकरणों में खराबी, ज्वलनशील सामग्री का अनुचित भंडारण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
हालांकि कई घटनाएं तकनीकी खराबी के कारण होती हैं, लेकिन बड़े हादसे अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही का परिणाम बन जाते हैं।
क्या रोकी जा सकती थीं ऐसी घटनाएं?
मालवीय नगर अग्निकांड ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन हो, नियमित निरीक्षण किए जाएं और आपातकालीन निकास मार्ग पूरी तरह कार्यशील रहें, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
सुरक्षा मंजूरी और निर्माण नियमों पर उठ रहे सवाल
अवैध निर्माण, अनधिकृत बेसमेंट, सीमित निकास मार्ग और बंद खिड़कियां आग जैसी घटनाओं को और घातक बना देती हैं। यदि किसी इमारत में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते नहीं हैं और इसके बावजूद उसे सुरक्षा मंजूरी मिल जाती है, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी जाती है।
मालवीय नगर हादसे के बाद अब यह मांग तेज हो रही है कि राजधानी में सभी व्यावसायिक इमारतों, रेस्टोरेंट, होटल और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।