गोल्डी ब्रांड ट्रेडमार्क विवाद दिल्ली कोर्ट फैसला
दिल्ली के साकेत स्थित कॉमर्शियल कोर्ट ने हाल ही में शुभम गोल्डी मसाले प्राइवेट लि. बनाम राम बिस्वास केस में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने माना है कि ‘गोल्डी’ ब्रांड का नाम मशहूर भारतीय मसाला कंपनी ‘शुभम गोल्डी मसाले प्राइवेट लिमिटेड’ के ब्रांड ‘GOLDIEE’ से बहुत मिलता-जुलता है, जिससे लोगों में भ्रम हो सकता है.
यह फैसला कॉमर्शियल कोर्ट में जज संदीप यादव ने सुनाया. व्यापारी समन मिलने के बाद भी अदालत में नहीं आया, जिसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी रोक लगाने का आदेश दिया.
कंपनी का पक्ष
कंपनी ने अदालत को बताया कि शुभम गोल्डी मसाले कंपनी की शुरुआत 1980 में कानपुर में हुई थी. कंपनी ‘GOLDIEE’ नाम से मसाले, चाय और कई अन्य खाद्य उत्पाद बनाती है. यह नाम ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर्ड है और समय-समय पर इसका नवीनीकरण भी होता है.
कंपनी ने कहा कि त्रिपुरा के व्यापारी ने भी ‘GOLDEY’ नाम से चाय, पॉपकॉर्न और मसालों के लिए ट्रेडमार्क रजिस्टर करवाने की कोशिश की. कंपनी का आरोप था कि यह लोगों को धोखा देने की कोशिश है ताकि वे समझें कि ये उत्पाद शुभम गोल्डी के हैं.
अदालत ने क्या कहा ?
अदालत ने माना कि ‘GOLDIEE’ और ‘GOLDEY’ दोनों नाम एक जैसे सुनाई देते हैं और दिखते भी लगभग एक जैसे हैं. इससे आम लोग आसानी से भ्रमित हो सकते हैं. भले ही त्रिपुरा के व्यापारी ने अभी तक ‘गोल्डी’ नाम से कोई उत्पाद बाजार में नहीं उतारा था, लेकिन अदालत ने माना कि सिर्फ इस नाम से ट्रेडमार्क के लिए आवेदन करना ही शुभम गोल्डी के ब्रांड के लिए एक “निकट और गंभीर खतरा” बन गया है.
अब व्यापारी को ‘GOLDEY’ या इससे मिलते-जुलते किसी भी नाम से चाय, पॉपकॉर्न या मसाले बेचने की अनुमति नहीं होगी.
साथ ही, अदालत ने उसे केस में शामिल न होने और सहयोग न करने के कारण शुभम गोल्डी कंपनी को ₹5 लाख देने का आदेश भी दिया है.
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