देहरादून में एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले एक मास्टर साहब पर गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगे हैं. जानकारी के अनुसार, उन्होंने न केवल अपने शिक्षक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई, बल्कि एक बड़ा आर्थिक घोटाला भी अंजाम दिया है. आरोप है कि मास्टर साहब ने अपनी पत्नी और कुछ करीबी रिश्तेदारों के नाम पर कुल तीन फर्जी कंपनियां बनाई थीं. इन कंपनियों का इस्तेमाल उन्होंने ठगी के एक सुनियोजित जाल के रूप में किया. बताया जा रहा है कि इन फर्जी कंपनियों के जरिए उन्होंने लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए उकसाया. मास्टर साहब ने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया कि उनका पैसा सुरक्षित है और उन्हें जल्दी ही भारी रिटर्न मिलेगा. लेकिन समय आने पर न मुनाफा मिला और न ही मूलधन वापस आया, शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि मास्टर साहब ने इस ठगी के जरिए लगभग 47 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम हड़प ली. जिसमे 15 हज़ार लोग इस ठगी के शिकार हुए.
2021 में शुरू की कंपनियां, लोगों को दिया ज्यादा ब्याज का झांसा
बता दें कि तीनों कंपनियां जिनके नाम थे सर्व माइक्रो फाइनेंस, दून समृद्धि निधि, और दून इन्फ्राटेक जो साल 2021 में बनाई गई थीं. इन कंपनियों ने आम लोगों को कहा कि अगर वे रोज़ाना या हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करें, या फिक्स्ड डिपॉजिट करें, तो बदले में उन्हें अच्छा ब्याज मिलेगा. यहां तक कि “सुकन्या योजना” के नाम पर भी पैसे लिए गए. लोगों ने इन योजनाओं में भरोसा करके अपने-अपने पैसे लगा दिए. लेकिन जब पैसे वापस मिलने का वक्त आया, तो किसी को कुछ नहीं मिला. अब तो इन कंपनियों के मालिक भी गायब हो गए हैं. जिन लोगों ने पैसा लगाया था, वो अब पुलिस से मदद मांग रहे हैं. शनिवार को करीब 50 से ज्यादा लोग देहरादून के एसएसपी से मिलने पहूंचे. कुछ महिलाएं तो रोते हुए बोलीं कि अब उन्हें डर है कि उनके खिलाफ ही कोई केस न हो जाए. क्योंकि उन्होंने भी अपने जान-पहचान वालों का पैसा इसमें लगवाया था.
आरोपी का परिवार ऐश में, बच्चे महंगे मेडिकल कॉलेज में
लोगों ने पुलिस को बताया कि आरोपी शिक्षक के बच्चे एक बड़े मेडिकल कॉलेज में MBBS कर रहे हैं. ऐसे में शक है कि ठगे गए पैसों का इस्तेमाल उनकी पढ़ाई और आलीशान ज़िंदगी में किया गया होगा. एक सरकारी कर्मचारी, विनोद कुमार, ने बताया कि उन्होंने बैंक से लोन लेकर इस कंपनी में पैसा लगाया था. आज भी वो उस लोन की EMI भर रहे हैं, लेकिन पैसे वापिस नहीं मिल रहे. आरोपी ने लोगों को यह भी कहा था कि कुमाऊं इलाके में फ्लैट बना रहे हैं, रियल एस्टेट का काम है. कुछ पैसा वहां लगाया गया है, अब पुलिस ये भी देख रही है कि वो प्रोजेक्ट असली था या सब दिखावा था. अब ये पूरा मामला पुलिस के पास है. एसएसपी ने जांच का भरोसा दिया है. लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें इंसाफ़ मिलेगा और उनका पैसा वापस आएगा.