अदालत ने मानवता को शर्मसार कर देने वाले एक हृदयविदारक घटना में दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है. बाह थाना क्षेत्र के फरैरा गांव की एक पांच वर्षीय मासूम बच्ची के साथ किए गए जघन्य अपराधों के लिए आज अदालत ने दोनों अभियुक्तों को मृत्युदंड की सजा सुनाकर न्यायालय की गरिमा को बरकरार रखा है.
गत 18 मार्च, 2024 को, फरैरा गांव निवासी वादी की पांच वर्षीय बेटी घर के पास एक नहर के किनारे खेल रही थी. इसी दौरान, गांव के ही दो युवकों, अमित और निखिल ने, बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए. जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिवार ने खोजबीन शुरू की और अंततः थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई.
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपियों ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी और उसके शव को एक सरसों के खेत में दबा दिया. इसके अलावा, आरोपियों ने मासूम के पिता को फोन कर छह लाख रुपये की फिरौती की मांग भी की थी.
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सरसों के खेत से बच्ची का शव बरामद किया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 (अपहरण), 364ए (फिरौती के लिए अपहरण), 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), 376डीबी (सामूहिक बलात्कार), 377 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया.
अदालती कार्यवाही और फैसला:
मामले की सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी सुभाष गिरि ने पैरवी की और 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए. सजा सुनाए जाने के समय अदालत कक्ष भीड़ से भरा हुआ था. जैसे ही न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई, दोषियों के चेहरे उतर गए. उनके परिजन फफक कर रो पड़े, जबकि पीड़ित परिवार की आंखों में राहत के आंसू थे. अदालत में मौजूद लोगों ने इस फैसले को ‘न्याय की जीत’ करार दिया.
एडीजीसी सुभाष गिरि का बयान:
इस मामले में सरकार की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी सुभाष गिरि ने कहा कि “यह निर्णय न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को और मजबूत करेगा. अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्य व गवाहों के माध्यम से यह सिद्ध किया कि अभियुक्तों ने जघन्य अपराध किया था.”