धर्म

Dasha Mata Vrat 2026: आज मनाया जा रहा है दशा माता व्रत, जानें सही पूजा विधि, डोरा बांधने का नियम और लाभ

लखनऊ: आज शुक्रवार को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर दशा माता व्रत मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा परिवार की सुख-समृद्धि, आर्थिक स्थिरता और घर की बिगड़ी दशा सुधारने के लिए रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि आज सुबह 6:28 बजे से शुरू होकर कल 14 मार्च सुबह 8:10 बजे तक रहेगी, इसलिए मुख्य व्रत और पूजा 13 मार्च को ही की जा रही है।

दशा माता कौन हैं और व्रत का धार्मिक महत्व

दशा माता को मां पार्वती का एक स्वरूप माना जाता है, जो घर-परिवार की दशा (परिस्थिति) को सुधारने वाली देवी हैं। यह व्रत मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में प्रचलित है। मान्यता है कि इस व्रत से ग्रहों की प्रतिकूल दशा शांत होती है, दरिद्रता दूर होती है, अनिष्ट ग्रह प्रभाव कम होते हैं और परिवार में सुख, शांति, संतान सुख तथा धन-धान्य की वृद्धि होती है।

कई जगहों पर यह व्रत होली के ठीक बाद शुरू होकर 10 दिनों तक चलता है, लेकिन मुख्य पूजा और उद्यापन चैत्र कृष्ण दशमी पर होता है। महिलाएं इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करती हैं और विशेष डोरा (धागा) बांधती हैं, जो जीवन की स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक है।

दशा माता व्रत की पूजा विधि (Puja Vidhi)

  1. सुबह की तैयारी: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर दशा माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। कलश स्थापित करें, जिसमें पानी, सुपारी, नारियल, सिक्के आदि रखें।
  2. डोरा बनाना: कच्चे सूत (कपास के धागे) से 10 तारों का डोरा बनाएं। इसमें 10 गांठ लगाएं। यह डोरा दशा माता की कृपा का प्रतीक है।
  3. पूजा सामग्री: फल, फूल, अक्षत, रोली, हल्दी, धूप, दीप, नैवेद्य (मीठा, फल, गुड़ आदि), दही, चावल और 10 प्रकार की सब्जियां (दशा माता को प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं)।
  4. मुख्य पूजा:
    • पीपल के पेड़ के नीचे जाकर पूजा करें (यदि संभव हो)। पीपल की 10 परिक्रमा लगाएं।
    • दशा माता को प्रणाम करें, मंत्र जपें: “ॐ दशा मातायै नमः” या “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं दशा मातायै स्वाहा”।
    • डोरा को गले में बांधें या हाथ में धारण करें। पूजा के दौरान दशा माता की कथा सुनें या पढ़ें।
    • कथा सुनने के बाद परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
  5. व्रत नियम: फलाहार या एक समय भोजन करें। नमक, अनाज, तेल आदि से परहेज रखें (क्षेत्रीय नियमों के अनुसार)। शाम को पूजा के बाद डोरा को सुरक्षित रखें और अगले साल तक पहनें या विसर्जित करें।
  6. अंतिम विधि: पूजा समाप्ति पर आरती करें और प्रसाद वितरित करें। मुख्य द्वार पर हल्दी-रोली से छापे लगाएं।

दशा माता व्रत की कथा (संक्षेप में)

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, राजा नल और दमयंती की तरह कई कथाओं में दशा माता की कृपा से बिगड़ी दशा सुधरी। महिलाएं 10 कथाएं सुनती हैं, जो दशा माता की महिमा बताती हैं। इन कथाओं में बताया जाता है कि कैसे देवी ने भक्तों की विपत्तियां दूर कीं और घर में स्थिरता लाई।

यह व्रत न केवल धार्मिक है, बल्कि पारिवारिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला भी है। आज के दिन दशा माता की कृपा से सभी की दशा सुधरे, यही कामना।

news desk

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