नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका के गल्फ कोस्ट की ओर बढ़ रहे चक्रवाती तूफान इसायस ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इन दोनों घटनाक्रमों के बीच क्रूड ऑयल के दाम में करीब 4 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी महंगा हुआ। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का असर भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम पर पड़ेगा या नहीं।
क्रूड ऑयल में 4% की तेजी, 104 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 4.08 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 104.28 डॉलर पर बंद हुआ। शुक्रवार सुबह इसमें कुछ नरमी आई और कीमत करीब 103.6 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करती दिखी। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत बढ़कर 91.49 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
कारोबार के दौरान एक समय दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 5 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। बाजार में इस उछाल की मुख्य वजह कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका है। मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव का खतरा और अमेरिका में तूफान की दस्तक ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका-ईरान तनाव और तूफान ने बढ़ाई मुश्किल
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के पीछे दो प्रमुख वजहें सामने आई हैं। पहली, अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका और दूसरी, चक्रवाती तूफान इसायस का अमेरिका के गल्फ कोस्ट की तरफ बढ़ना।
तूफान के कारण तेल रिफाइनरियों और आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर उत्पादन या सप्लाई में रुकावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता घट सकती है। इससे कीमतों पर और दबाव बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से बाजार को कुछ राहत मिली। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है और 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव तक ईरान पर सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि उनका देश होर्मुज स्ट्रेट खोलने से जुड़े अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
बातचीत के बीच ईरान पर अमेरिका ने कसे प्रतिबंध
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरों के बावजूद तनाव कम होने के संकेत स्पष्ट नहीं हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत 17 तेल टैंकरों के साथ व्यक्तियों और नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।
दूसरी ओर, फ्रांस और सऊदी अरब यानबू तेल टर्मिनल की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की समीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा, सीरिया सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य सहायता देने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। क्षेत्र में जारी इन गतिविधियों के कारण तेल की सप्लाई और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर, यहां से गुजरता है 20% तेल
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम समुद्री मार्ग है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने या सैन्य टकराव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के आठवें महीने में मालवाहक जहाजों पर हमलों में तेजी आई है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि ईरानी हमलों का स्तर ऊंचा बना हुआ है और हालात आगे और बिगड़ सकते हैं।
इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने तेल भंडार तेजी से जारी करने का फैसला किया है, ताकि बाजार में आपूर्ति की कमी को कम किया जा सके और पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता पर दबाव न बढ़े। हालांकि, अगर होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही बाधित होती है या मिडिल ईस्ट में संघर्ष तेज होता है, तो इसका असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्रूड ऑयल महंगा होने से तेल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आते ही पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम बढ़ना तय नहीं है।
घरेलू कीमतों पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल में तेजी कितनी देर बनी रहती है, रुपये की विनिमय दर कैसी रहती है और तेल कंपनियां लागत में हुए बदलाव को किस तरह समायोजित करती हैं। फिलहाल, क्रूड ऑयल के दाम में आई तेजी से पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका जरूर बढ़ी है, लेकिन कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की पुष्टि नहीं की जा सकती।