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रियो डी जनेरियो की सड़कों पर लाशों की कतार, मरने वालों की संख्या पहुंची 130! ब्राजील में ‘NARCOS’ पर पुलिस का तांडव या नरसंहार?

ब्राजील की राजधानी रियो डी जनेरियो में एक प्रमुख ड्रग कॉर्टेल ‘रेड कमांड’ को निशाना बनाकर किए गए देश के अब तक के सबसे बड़े और खूनी पुलिस ऑपरेशन के बाद तनाव और आक्रोश व्याप्त है. पुलिस ऑपरेशन के तरीके को लेकर सवाल उठा रहे है. इस हिंसक ऑपरेशन में अधिकारियों के अनुसार, मारे गए लोगों की संख्या 132 तक पहुंच गई है, जिसने रियो के इतिहास में पिछले सभी घातक ऑपरेशनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

लाशों से पटी राजधानी की सड़कें!

राज्य के पब्लिक डिफेंडर कार्यालय ने मृतकों की संख्या 132 होने की पुष्टि की है, जबकि राज्य पुलिस ने यह संख्या 119 बताई है. मृतकों में चार पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं. आंशका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है.

ये ऑपरेशन मंगलवार को ‘अलेमाओ’ और ‘पेन्हा’ की बस्तियों में शुरू हुआ. जहां आमतौर पर गरीब लोग ज्यादा रहते हैं. पुलिस की छापेमारी के एक दिन बाद, पेन्हा के निवासियों ने रात भर आसपास के जंगल से शवों को निकाला. गुस्साए और शोकाकुल निवासियों ने लगभग 70 से अधिक शवों को एक मुख्य चौराहे के फुटपाथ पर कतार में रखा. उन्होंने पुलिस पर नरसंहार का आरोप लगाते हुए नारे लगाए. स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार, कई शवों पर पीछे से गोली मारे जाने, सिर में घाव और यहां तक कि यातना के संकेत भी मिले हैं.

ऑपरेशन के बचाव में सरकार  

रियो के गवर्नर क्लाउडियो कास्त्रो ने इस ऑपरेशन का बचाव किया है. उन्होंने इसे शहर के इतिहास का सबसे बड़ा अभियान बताते हुए कहा कि यह नारको-आतंकवाद के खिलाफ एक “कड़ा प्रहार” था. गवर्नर ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई सफल रही, जिसमें 113 कथित गिरोह सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में हथियार तथा ड्रग्स जब्त किए गए. उन्होंने यह भी कहा कि “एकमात्र पीड़ित” ऑपरेशन में मारे गए पुलिस अधिकारी थे, जबकि बाकी लोग जंगल से गोलीबारी करने वाले अपराधी थे.

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संघीय न्याय मंत्री रिकार्डो लेवांडोव्स्की ने कहा कि ‘राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा मौतों की संख्या से स्तब्ध हैं, और इस बात से भी हैरान हैं कि संघीय सरकार को सूचित किए बिना इतना हिंसक अभियान चलाया गया’. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने इस घातक ऑपरेशन पर गहरी चिंता व्यक्त की है और अधिकारियों से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत प्रभावी और त्वरित जांच करने का आग्रह किया है.

news desk

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