दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उसके बाद दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। सरकार की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे अब तक केंद्र सरकार या गृह मंत्रालय से कोई आधिकारिक लिखित आदेश नहीं मिला है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बिना लिखित निर्देश के किसी भी मामले को कानूनी रूप से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर हिंसा और उससे जुड़े घटनाक्रम में करीब 20 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें अधिकांश मामले प्रदर्शन, हिंसा और कानून-व्यवस्था भंग करने से जुड़े हैं, जबकि एक मामला प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का भी शामिल है। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, लिखित आदेश मिलने के बाद अभियोजन पक्ष उपराज्यपाल से मामलों को वापस लेने की अनुमति मांगेगा। एलजी की मंजूरी मिलने के बाद ही संबंधित अदालतें इन मामलों को समाप्त करने पर अंतिम फैसला लेंगी।
हालांकि सभी मामलों को एक साथ वापस लेना संभव नहीं होगा। जिन एफआईआर को दिल्ली पुलिस ने सरकार की ओर से दर्ज किया है, केवल उन्हीं पर सरकार कार्रवाई कर सकती है। दूसरी ओर, पत्रकारों और मीडियाकर्मियों पर हमले से जुड़े मामलों में शिकायतकर्ताओं की लिखित सहमति जरूरी होगी। उनकी मंजूरी के बिना ऐसे मुकदमे वापस नहीं लिए जा सकते।
मामलों में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर अपने वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों से किए गए समझौते का पालन नहीं किया जा रहा है। छात्र संगठनों का आरोप है कि दिल्ली के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी छात्रों और वॉलंटियर्स के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
इस बीच छात्र संगठनों ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें दोहराई हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे जल्द वापस लिए जाएं, गिरफ्तार छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए और सरकार केस वापसी की पूरी कानूनी प्रक्रिया व समय-सीमा को लिखित रूप में सार्वजनिक करे। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय के भीतर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो देशभर में दोबारा बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।