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पीरियड्स दर्द को ‘नॉर्मल’ समझना पड़ सकता है भारी, 19 साल की लड़की की मौत ने खोली आंखें

आज के दौर में जहां हम चांद पर पहुंचने और टेक्नोलॉजी की बातें कर रहे हैं, वहीं एक 19 साल की स्टूडेंट ने वो कदम उठाया जिसने समाज की ‘चुप्पी’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्नाटक के तुमकुरु में एक युवती ने पीरियड्स के दौरान होने वाले असहनीय दर्द से तंग आकर अपनी जान दे दी।

ये केवल एक सुसाइड केस नहीं है, बल्कि उस मेडिकल इग्नोरेंस का नतीजा है जिसे अक्सर ‘लड़कियों को तो सहना ही पड़ता है’ कहकर दबा दिया जाता है।

क्या हुआ उस दिन?
कीर्तना काफी समय से डिसमेनोरिया (Dysmenorrhea) की शिकार थी। Dysmenorrhea एक मेडिकल टर्म है जिसका मतलब है (पीरियड्स के दौरान होने वाला तेज़, क्रैम्पिंग वाला दर्द), हर महीने होने वाला ये दर्द सिर्फ शारीर नहीं, बल्कि उसके मेंटल हेल्थ पर भी हावी हो रहा था।
घटना वाले दिन, कीर्तना को दर्द इस कदर बढ़ गया जिसे वो सहन न कर पाई और उसे लगा कि इस ‘हर महीने की सजा’ से बेहतर तो मौत है। जिसके बाद उसने अपनी जान देदी|

पुलिस जांच में सामने आया है कि कलाबुरगी के सलहल्लि की रहने वाली कीर्तना बहुत ही होनहार स्टूडेंट थी, और पढाई पूरी कर काम की तलाश में वो अपने घर से दूर अपने मामा के यहा रह रही थी लेकिन उनसे घर में किसी को भी इस दर्द का अंदाजा नही था, जिसके चलते इस क्रोनिक पेन ने उसे गहरे डिप्रेशन में धकेल दिया था।

परिवार का कहना है कि कीर्तना लंबे समय से तेज़ पेट दर्द और हैवी पीरियड क्रैम्प्स झेल रही थी। दर्द इतन ज़्यादा थी कि कई बार वो अपनी रोज़मर्रा की लाइफ भी मैनेज नहीं कर पाती थी।

पीरियड्स के दर्द को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है।
डॉक्टरों के अनुसार, अगर पीरियड्स का दर्द आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है, कामकाज या पढ़ाई रोक रहा है, तो इसे बिल्कुल भी सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

डॉक्टर्स ये भी चेतावनी देते हैं कि कई लोग इस दर्द को दबाने के लिए बार-बार पेनकिलर का सहारा लेते हैं। ऐसा करने से दर्द की असली वजह छुप जाती है और कुछ मामलों में यह आगे चलकर गंभीर जानलेवा समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

इसलिए ज़रूरी है कि लगातार या असहनीय पीरियड्स दर्द को हल्के में न लें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।

news desk

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