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असम चुनाव 2026 में कांग्रेस का नया दांव; टिकट चाहिए तो देने होंगे 50 हजार रुपये और खानी होगी ‘वफादारी’ की कसम

10 साल से असम की सत्ता से बाहर कांग्रेस 2026 के विधानसभा चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। यही कारण है कि भले ही राज्य में चुनाव का ऐलान होने में देर हो लेकिन कांग्रेस उम्मीदवारों का चयन शुरू कर चुकी है। इस बार कांग्रेस पार्टी ने चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं के लिए कुछ कड़े और नए नियम बनाए हैं। पार्टी का मकसद केवल उन लोगों को चुनना है जो सच में चुनाव को लेकर गंभीर हैं और पार्टी के प्रति वफादार भी। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने साफ कर दिया है कि इस बार टिकट पाना केवल सिफारिश का खेल नहीं, बल्कि वफादारी और डिजिटल मजबूती की परीक्षा होगी।

50,000 की फीस
कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार को एक ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरना होगा साथ ही 50,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (DD) भी देना होगा। पार्टी का कहना है कि ये पैसा चुनाव के खर्च और पार्टी की मजबूती के लिए इस्तेमाल होगा और इससे फालतू के आवेदनों की भीड़ भी कम होगी।

बगावत रोकने का न्यू फॉर्मूला
अक्सर देखा जाता है कि टिकट न मिलने पर नेता पार्टी छोड़ देते हैं या निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी ही पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं। इसे रोकने के लिए कांग्रेस ने एक शपथ पत्र (Undertaking) अनिवार्य कर दिया है। हर दावेदार को लिखकर देना होगा कि:
टिकट न मिलने पर भी वो पार्टी नहीं छोड़ेगा। वो असली उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगा। और जिसे टिकट मिलेगा, उसे जिताने के लिए वो पूरा जोर लगाएगा।

सोशल मीडिया पर कितने पॉपुलर हैं आप?
अब केवल जमीन पर काम करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस ये भी देख रही है कि उम्मीदवार फेसबुक, इंस्टाग्राम और X पर कितना एक्टिव है। फॉर्म में उम्मीदवारों को अपने फॉलोअर्स की संख्या बतानी होगी। पार्टी चाहती है कि उम्मीदवार सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक आसानी से पहुंच सकें।

कब तक कर सकते हैं आवेदन?
टिकट के लिए फॉर्म 5 जनवरी से 20 जनवरी 2026 के बीच जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद पार्टी बड़े नेता इन नामों पर फैसला लेंगे।

क्यों हो रहा है विवाद?
बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि कांग्रेस टिकट ‘बेच’ रही है। वहीं, असम कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा का कहना है कि ये नियम केवल अनुशासन बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं ताकि सब मिलकर चुनाव लड़ें।

दरअसल असम कांग्रेस का एक मजबूत गढ़ था। लेकिन 2011 के बाद कांग्रेस राज्य की सत्ता से बाहर है। लेकिन इस बार कांग्रेस को उम्मीद है कि 10 साल की एंटी इकंबेंसी के चलते उसकी सत्ता में वापसी हो सकती है।

news desk

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