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‘रेपिस्ट का रक्षक’ टिप्पणी पर संसद में संग्राम, राहुल-प्रियंका के बयान से मचा बवाल, बीजेपी ने किया तीखा पलटवार

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के सातवें दिन लोकसभा में नए शिक्षा मंत्री को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। सदन के भीतर की गई टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद बाहर तक पहुंच गया, जहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मीडिया के सामने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर तीखी टिप्पणी की। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।

सदन में टिप्पणी पर शुरू हुआ विवाद

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान प्रियंका गांधी की एक टिप्पणी पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आपत्ति जताई और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का सत्यापन कराने की मांग की। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी सांसदों से तथ्यों की पुष्टि के बाद ही टिप्पणी करने की सलाह दी और प्रियंका गांधी की टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।

सदन के बाहर राहुल और प्रियंका ने दोहराया आरोप

विवाद यहीं नहीं थमा। सदन के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा ने देश का शिक्षा मंत्री ऐसे व्यक्ति को बनाया है, जिसे उन्होंने “रेपिस्ट का डिफेंडर” बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पास कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना, जो बलात्कारियों का बचाव करता है।

प्रियंका गांधी ने भी अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी तथ्यों पर आधारित है।

राहुल गांधी ने दस्तावेज दिखाकर किया बचाव

लोकसभा में हंगामे के बीच राहुल गांधी बाहर गए और एक दस्तावेज लेकर लौटे। उन्होंने वह कागज प्रियंका गांधी को दिया, जिसके आधार पर प्रियंका ने सदन में दावा किया कि उनकी टिप्पणी एक प्रकाशित लेख पर आधारित थी। इस दौरान सत्ता पक्ष के सांसद लगातार उनसे माफी की मांग करते रहे।

बीजेपी ने आरोपों को बताया भ्रामक

बीजेपी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी को “गुमराह करने वाला, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय” बताया। उन्होंने कहा कि किसी केंद्रीय मंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

‘बिलकिस बानो मामले में ऐसा कोई बयान नहीं दिया’

अनिल बलूनी ने कहा कि जिस मामले का हवाला देकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आरोप लगा रहे हैं, उसमें प्रह्लाद जोशी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। उनके अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने केवल कानूनी प्रक्रिया पर टिप्पणी की थी, न कि मामले या उसके गुण-दोष पर।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने तथ्यों को सही ढंग से पढ़े और समझे बिना बयान दिया तथा अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार तथ्यों को प्रस्तुत किया।

vineet verma

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