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कांग्रेस का सख़्त जवाब: “ओपन लेटर लिखने वाले सरकारी लाभार्थी”, बीजेपी प्रवक्ता पर दो बार वोट डालने का बड़ा दावा!

नई दिल्ली– देशभर में चुनाव आयोग पर लग रहे “वोट चोरी” के आरोपों के चलते राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है. इसी बीच कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन राजेंद्र पाल ने एक तीखा बयान जारी कर राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है. यह बयान उस ओपन लेटर के जवाब में आया है जिसे 272 रिटायर्ड जज, ब्यूरोक्रेट्स और सैन्य अधिकारियों ने हाल ही में जारी किया था.

राजेंद्र पाल का पलटवार – “272 में से 99% सवर्ण, दलित-पिछड़ों से नफरत करते हैं”


कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल ने कहा कि ओपन लेटर पर हस्ताक्षर करने वाले लोग “सरकार से लाभ उठाने वाले” हैं और उनके रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि—
“272 में से 99% लोग सवर्ण हैं जो दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज से नफरत करते हैं. ये लोग वोट चोरी के आरोपों पर, और एक दलित IPS की आत्महत्या पर सवाल क्यों नहीं उठाते?”

राहुल गांधी के समर्थन में उतरे राजेंद्र पाल


पाल ने कहा कि भाजपा, ED और CBI के दबाव के बावजूद राहुल गांधी ही एकमात्र नेता हैं जो जनता के मुद्दों पर निडरता से लड़ रहे हैं और पीछे नहीं हटते.
अपने बयान में राजेंद्र पाल ने एक भाजपा नेता और प्रवक्ता पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि फरवरी में उक्त नेता ने दिल्ली में वोट डाला, और सोशल मीडिया पर उसका पोस्ट किया. नवंबर में वही नेता बिहार में वोट डाल आया, और उसका पोस्ट भी वायरल हुआ.

उन्होंने सवाल उठाया, “एक व्यक्ति दो राज्यों में वोट कैसे डाल सकता है? चुनाव आयोग ने इस पर क्या कार्रवाई की?”

ओपन लेटर में लगाए गए आरोप


16 पूर्व जज, 123 पूर्व ब्यूरोक्रेट (14 पूर्व राजदूत सहित) और 133 पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा जारी खुले पत्र में कहा गया था कि

  • कांग्रेस और राहुल गांधी चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर अनावश्यक आरोप लगा रहे हैं।
  • इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर होता है।
  • चुनाव आयोग देश की चुनाव प्रणाली की “रीढ़” है और उस पर लगातार सवाल उठाना देशहित में नही है।

राहुल गांधी का रुख पहले से ही सख्त
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीते दिनों चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर लगातार तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस की थीं और आयोग को मोदी सरकार की “B टीम” बताया था।

जनता के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत
इस बयानबाजी के बाद यह साफ है कि चुनाव आयोग को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में और राजनीतिक टकराव को जन्म दे सकते हैं। कांग्रेस इसे जनता के अधिकारों का मुद्दा बता रही है, जबकि पूर्व अधिकारियों का समूह इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करार दे रहा है।

news desk

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