क्राइम

ग्वालियर हाईकोर्ट में ‘हसबैंड स्वैपिंग’ का अजीब मामला: सगी बहनों ने कोर्ट में कहा- ‘हमें एक-दूसरे के पति पसंद हैं’

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट में हाल ही में एक ऐसा कानूनी मामला सामने आया, जिसने न केवल वकीलों बल्कि न्यायमूर्तियों को भी हैरत में डाल दिया।

दतिया जिले से जुड़ा यह मामला एक ‘अपहरण’ की शिकायत के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन कोर्ट रूम के भीतर जो खुलासा हुआ, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था।

दो सगी बहनों ने जजों के सामने खुलेआम स्वीकार किया कि वे अपने पतियों की ‘अदला-बदली’ (Husband Swapping) करना चाहती हैं। ये मामला काफी थोड़ा पुराना है लेकिन सोशल मीडिया पर इस खबर पर जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग कई तरह की बातें कह रहे हैं।

अपहरण की याचिका और ‘किडनैपर’ का सच

इस कानूनी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब गिरिजा शंकर नामक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) दायर की। गिरिजा का आरोप था कि मायाराम नामक व्यक्ति ने उसकी पत्नी और बेटी का अपहरण कर उन्हें बंधक बना रखा है। कोर्ट के आदेश पर जब पुलिस ने महिला को ढूंढ निकाला और कोर्ट में पेश किया, तो कहानी ने पूरी तरह यू-टर्न ले लिया।

कोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जब महिला जस्टिस के सामने खड़ी हुई, तो उसने साफ़ कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ है। महिला ने बताया वह अपनी मर्जी से मायाराम के साथ रह रही है। हैरत की बात यह थी कि मायाराम उसका सगा बहनोई (बड़ी बहन का पति) है। महिला ने पहले ही अपने वर्तमान पति (याचिकाकर्ता) से तलाक की अर्जी दे रखी है और वह अब अपने जीजा के साथ ही रहना चाहती है।

बड़ी बहन का रिएक्शन: “मुझे भी जीजाजी ही पसंद हैं”

इस मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब मायाराम की पत्नी (यानी याचिकाकर्ता की साली) ने इस पर आपत्ति जताने के बजाय अपनी सहमति दे दी। उसने कोर्ट में बयान दिया कि यदि उसकी छोटी बहन उसके पति के साथ रहना चाहती है, तो उसे कोई ऐतराज नहीं है।

इतना ही नहीं, उसने भी अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि उसे भी अपने जीजा (याचिकाकर्ता) में दिलचस्पी है। दोनों बहनों, जिनके अपने-अपने बच्चे भी हैं, ने आपसी सहमति से एक-दूसरे के पतियों के साथ घर बसाने की बात कहकर सबको स्तब्ध कर दिया।

बहनों का कोर्ट में संयुक्त बयान

“यह अपहरण नहीं, बल्कि आपसी सहमति से लिया गया फैसला है। हम दोनों बहनें अपने वर्तमान वैवाहिक जीवन से खुश नहीं हैं और एक-दूसरे के पति के साथ रहना चाहती हैं।” –

हाईकोर्ट का फैसला: याचिका खारिज

बता दे कि ग्वालियर हाईकोर्ट ने दोनों महिलाओं के बयानों को सुनने के बाद पाया कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से जीवन का फैसला ले रही हैं। एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट डीके शर्मा के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि महिला अपनी स्वेच्छा से रह रही है, इसलिए यह अवैध हिरासत या अपहरण का मामला नहीं बनता।

कोर्ट ने इसे एक पारिवारिक विवाद करार देते हुए गिरिजा शंकर की याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, कानूनी तौर पर पतियों की यह अदला-बदली भविष्य में कितनी वैध होगी, यह अभी भी एक जटिल प्रश्न बना हुआ है, लेकिन फिलहाल इस ‘हसबैंड स्वैपिंग’ केस ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है।

news desk

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