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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से दूरी बनाने की अपील, मुस्लिम युवाओं को मस्जिदों और सोशल मीडिया के जरिए दी जा रही सलाह

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले मुस्लिम समुदाय के भीतर एक अलग तरह की चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप समूहों और मस्जिदों के माध्यम से युवाओं से प्रदर्शन में शामिल होने से पहले गंभीरता से विचार करने की अपील की जा रही है। कई जगहों पर युवाओं को ऐसे आयोजनों से दूरी बनाए रखने और अपने भविष्य व करियर को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

सोशल मीडिया पर चल रहा जागरूकता अभियान

समुदाय के बीच साझा किए जा रहे संदेशों में कहा जा रहा है कि किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले उसके संभावित परिणामों को समझना जरूरी है। कुछ पोस्ट में युवाओं को यह सलाह दी गई कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान अप्रिय स्थिति बनती है तो उसके असर लंबे समय तक रह सकते हैं। इसी कारण प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास जाने से भी बचने की बात कही गई है।

युवाओं को करियर पर ध्यान देने की सलाह

रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवार भी अपने बच्चों को ऐसे आयोजनों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। एक छात्र ने बताया कि उसके परिवार ने फिलहाल शिक्षा और करियर पर ध्यान केंद्रित करने को अधिक महत्वपूर्ण बताया है। परिवार का मानना है कि पहले खुद को मजबूत बनाना जरूरी है, उसके बाद समाज के लिए बेहतर योगदान दिया जा सकता है।

मस्जिदों से भी दी गई सावधानी बरतने की नसीहत

शुक्रवार को शाहीन बाग क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज के बाद इमाम ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक बदलाव केवल सड़कों पर उतरकर ही नहीं आता, बल्कि शिक्षा, आर्थिक प्रगति और सामुदायिक कार्यों के जरिए भी सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने युवाओं से भावनाओं के बजाय समझदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेने की अपील की।

प्रदर्शन में शामिल होने से पहले उठाए गए सवाल

बटला हाउस क्षेत्र के एक धार्मिक पदाधिकारी ने कहा कि किसी भी आंदोलन या प्रदर्शन का हिस्सा बनने से पहले उसके उद्देश्य, आयोजकों और संभावित परिणामों को समझना जरूरी है। उनका कहना था कि युवाओं को यह विचार करना चाहिए कि संबंधित कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा या नहीं और उसमें शामिल होने से उन्हें या समाज को वास्तविक लाभ मिलेगा या नहीं।

समुदाय के भीतर अलग-अलग राय भी सामने आई

हालांकि, इस मुद्दे पर सभी लोगों की राय एक जैसी नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। ऐसे लोगों का मानना है कि किसी भी आंदोलन को केवल आशंकाओं के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

 

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