देश के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर अदालत कक्ष में हुए जूता फेंकने की कोशिश को लेकर उनका परिवार गुस्से में है. इस घटना के बाद सीजेआई की बहन कीर्ति गवई ने सख्त शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए इसे “जहरीली विचारधारा का संविधान पर हमला” करार दिया है.
परिवार ने जताई घटना पर नाराज़गी
मीडिया से बातचीत में सीजेआई गवई की बहन कीर्ति गवई ने कहा कि उनके भाई ने इस मामले को नज़रअंदाज़ करने का सुझाव दिया था, लेकिन ऐसा करना सही नहीं होगा. उन्होंने साफ शब्दों में कहा—
‘यह उनकी विनम्रता है कि उन्होंने कोर्ट से मामले को छोड़ देने की बात कही, लेकिन अगर हम ऐसे असंवैधानिक बर्ताव पर आंख मूंद लेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी.’
कीर्ति गवई ने इसे सिर्फ व्यक्तिगत हमला न मानकर संविधान पर सीधा हमला बताया. उन्होंने यह भी कहा कि ‘संविधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है.’
मां कमलताई गवई ने भी जताया था रोष
इससे पहले सीजेआई गवई की मां कमलताई गवई ने भी हमले की कोशिश पर कड़ा रोष जताया था. परिवार का कहना है कि अदालत और संविधान की गरिमा पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
क्या था मामला ?
दरअसल बीते सोमवार 6 अक्टूबर को एक 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीट पर बैठे सीजेआई की ओर जूता उछालने की कोशिश की थी.
हालांकि, सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया था और हमले को नाकाम कर दिया था. घटना के समय आरोपी वकील ने धार्मिक नारे भी लगाये थे, जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल है.
हमलावर वकील राकेश किशोर ने अपनी हरकत को सीजेआई की हालिया टिप्पणियों से जोड़ते हुए बयान दिया है कि वह सीजेआई गवई की विष्णु भगवान की मूर्ति और बुलडोज़र कार्रवाई जैसे मुद्दों पर कोर्ट की कार्यवाही के दौरान कुछ टिप्पणियों से आहत था, इसलिए उसने ‘विरोध जताने’ के लिए यह कदम उठाया.