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APEC Summit से पहले चीन का बड़ा दांव! अमेरिकी दबाव में रोकी रूसी तेल की खरीद, क्या ट्रंप-शी मुलाकात में होगी कोई बड़ी डील?

द.कोरिया (सियोल): अमेरिका, चीन और रूस के बीच चल रही तनातनी ने एक बार फिर ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों एशिया के तीन देशों—मलेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया—के दौरे पर हैं. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि उनके देश में इस वक्त सरकारी शटडाउन चल रहा है, जिससे ट्रंप खुद घरेलू दबाव में हैं. इसी बीच चीन ने भी एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी दबाव के चलते समुद्री रास्ते से रूसी तेल की खरीद पर फिलहाल रोक लगा दी है. यह फैसला तब आया है जब अमेरिका ने रूस की दो दिग्गज तेल कंपनियों—रोसनेफ्ट और लुकोइल—पर नए प्रतिबंध लगाए हैं.

अमेरिकी दबाव का असर?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की बड़ी तेल कंपनियां जैसे पेट्रोचाइना, सिनोपेक, सीएनओओसी और झेनहुआ ऑयल ने अभी के लिए रूसी तेल खरीदना रोक दिया है. इन कंपनियों को डर है कि अमेरिका के प्रतिबंधों का असर उनके कारोबार पर भी पड़ सकता है. अब सोचिए, चीन हर दिन करीब 1.4 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदता है—ऐसे में इस रोक से रूस की कमाई पर जबरदस्त असर पड़ सकता है और दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. इस बीच खबर आ रही है की भारत भी रूस से तेल खरीदना कम कर सकता है.

उधर अमेरिका और चीन के बीच भी आर्थिक जंग जारी है। चीन ने हाल ही में दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Metals) के निर्यात के नियम सख्त किए थे, जिसे अमेरिका ने “टेक्नोलॉजी ब्लैकमेल” बताया. जवाब में ट्रंप ने धमकी दी कि वो चीन के प्रोडक्ट्स पर 100% टैक्स लगा देंगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों देश अब “ट्रेड वॉर” से आगे बढ़कर “इकोनॉमिक वॉर” में उतर चुके हैं और इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है.

APEC सम्मेलन से पहले बढ़ी हलचल

ट्रंप का एशिया दौरा अब खास इसलिए भी हो गया है क्योंकि वो APEC सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं. हालांकि अमेरिका के भीतर शटडाउन की वजह से लाखों सरकारी कर्मचारी वेतन नहीं पा रहे हैं, जो बताता है कि ट्रंप भी काफी दबाव में हैं. वहीं चीन का रूस से तेल आयात पर रोक लगाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच APEC में कोई बड़ा समझौता हो सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में जबरदस्त अस्थिरता देखने को मिल सकती है. भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देश अब मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देशों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे वहां के तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं.

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात साफ दिखा रहे हैं कि दुनिया एक नए “पावर बैलेंस” की तरफ बढ़ रही है—जहां अमेरिका अपनी आर्थिक ताकत से दबाव बना रहा है, चीन कूटनीतिक चालें चल रहा है, और रूस ऊर्जा के सहारे टिके रहने की कोशिश में जुटा है.

Gopal Singh

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