सवालों के घेरे में बीजेपी एमएलसी!
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब भाजपा विधान परिषद सदस्य सुरेंद्र चौधरी ने उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी शूटर गुलाम हसन के भाई राहिल हसन को अपना ‘अल्पसंख्यक समाज का प्रतिनिधि’ नियुक्त कर दिया.
यह मामला तब गरमाया जब राहिल हसन के नियुक्ति पत्र और एमएलसी के साथ उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं. राहिल वही शख्स है जिसे उसके भाई गुलाम के एनकाउंटर में मारे जाने और हत्याकांड में शामिल होने के खुलासे के बाद भाजपा ने अपनी प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था.
“अपराध भाई का, सजा उसे क्यों?
एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने विवाद बढ़ने पर पहले तो अपने फैसले का बचाव किया. उन्होंने दलील दी कि राहिल का अपना कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं. एमएलसी ने कहा, “अपराध उसके भाई ने किया है, राहिल को उसके काम के आधार पर नियुक्त किया गया था”.
भारी सियासी दबाव में फैसला पलटा
विरोध की आंच तेज होने पर एमएलसी सुरेंद्र चौधरी तुरंत बैकफुट पर आ गए. उन्होंने तत्काल प्रभाव से राहिल हसन की नियुक्ति रद्द कर दी. चौधरी ने सफाई देते हुए कहा, “पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है. राहिल को प्रतिनिधि पद से हटाया जा रहा है.” कुछ ही घंटों में लिया गया यह ‘यू-टर्न’ स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पार्टी को इस कदम से हुए राजनीतिक नुकसान का अंदाजा हो गया था.
इस घटना से विपक्षी दलों को भाजपा पर हमला करने का सीधा मौका मिल गया. समाजवादी पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का ‘जीरो टॉलरेंस’ केवल मीडिया की सुर्खियों और चुनावी भाषणों तक सीमित है.
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